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किस्मत अच्छी कि गैस नहीं है, चौड़ी मुस्कान चाय बेचने वालों के चेहरे पर! हाथों में संकट का 'इंस्टेंट' समाधान

घाटे के बादल हटाकर उम्मीद की रोशनी देख रहा है असम का चाय उद्योग।

गुवाहाटी: पश्चिम एशिया के युद्ध की आंच सीधे भारत की रसोई तक पहुंच गई है। गुरुवार को संसद में पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भले ही दावा किया कि भारत में रसोई गैस या LPG की कोई कमी नहीं है लेकिन असल तस्वीर कुछ और ही कहानी कह रही है। एक के बाद एक नामी-गिरामी रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं। मंदिरों में भोग-प्रसाद का वितरण रोका जा रहा है। आम लोगों की शिकायत है कि बुकिंग करने के बाद सिलेंडर मिलने में काफी समय लग रहा है। केंद्र की ओर से ESMA भी लागू किया गया है। कुल मिलाकर रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं।

इसी समय असम के चाय उद्योग में उलटी तस्वीर देखने को मिल रही है। गैस संकट के इसी माहौल में अप्रत्याशित रूप से गुवाहाटी के चाय विक्रेता उम्मीद की किरण देख रहे हैं।

घिर आए थे संकट के बादल

युद्ध के कारण ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग बंद कर देने से कई उद्योगों की तरह असम के चाय उद्योग को भी बड़ा झटका लगा है। गुवाहाटी टी ऑक्शन बायर्स एसोसिएशन की जानकारी के अनुसार असम की ऑर्थोडॉक्स चाय के बड़े खरीदारों में ईरान और पश्चिम एशिया के अन्य देश शामिल हैं।

भारत से जितनी चाय विदेशों में निर्यात होती है, उसका लगभग 40 प्रतिशत से ज्यादा इन्हीं देशों में जाता है और यह चाय इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते जाती है। इस रास्ते के बंद हो जाने से असम के चाय व्यापारियों और बागान मालिकों के सामने संकट खड़ा हो गया था।

LPG संकट में 'इंस्टेंट' की बाजी

निर्यात बाजार को झटका लगने के बावजूद देश के भीतर चाय उद्योग के लिए आय का एक नया रास्ता खुल गया है। एसोसिएशन के सचिव दिनेश बिहानी ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के कारण LPG आपूर्ति को लेकर लोगों में चिंता बढ़ने के बाद से इंस्टेंट चाय, खासकर टी-बैग की बिक्री तेजी से बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक चाय बनाने के लिए गैस, दूध और पानी उबालने की जरूरत होती है लेकिन इलेक्ट्रिक केतली या इंडक्शन हीटर पर आसानी से इंस्टेंट चाय बनाई जा सकती है। इससे रसोई गैस पर निर्भरता काफी कम हो जाती है।

भविष्य

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार शहरी परिवारों, ऑफिसों, ट्रैवल हब और छोटे फूड आउटलेट्स में रसोई गैस का उपयोग कम करने के लिए इंस्टेंट चाय की मांग लगातार बढ़ रही है। चाय बनाने वाली कंपनियों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में युद्ध लंबा चलता है तो वैल्यू एडेड चाय सेगमेंट और तेजी से बढ़ेगा। इस सेगमेंट में इंस्टेंट टी पाउडर, प्रीमिक्स और रेडी टू ड्रिंक जैसे उत्पाद शामिल हैं। इसके चलते असम के चाय उद्योग को देश और विदेश दोनों बाजारों में बेहतर कीमत पर अपने उत्पाद बेचने और नए खरीदारों तथा नए बाजारों को हासिल करने का बड़ा अवसर मिल सकता है।

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