नई दिल्ली: भाजपा की परिवर्तन यात्रा के दौरान बंगाल आकर रेल परियोजनाओं के लिए जमीन न देने का आरोप लगाते हुए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने राज्य सरकार पर निशाना साधा था। हालांकि संसद में रेल किराये को लेकर अभिषेक बनर्जी के सवालों का संतोषजनक जवाब अश्विनी नहीं दे पाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले जनवरी में हावड़ा–कामाख्या रूट पर देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की शुरुआत की थी। इस प्रीमियम ट्रेन का किराया क्या मध्यवर्ग और निम्न मध्यवर्ग के लोग वहन कर पा रहे हैं, क्या इसका कोई आकलन किया गया है? किस तर्क से इस ट्रेन में RAC की सुविधा नहीं रखी गई? तृणमूल के लोकसभा दल के नेता के ऐसे कई सवालों का स्पष्ट जवाब अश्विनी नहीं दे पाए।
हावड़ा–कामाख्या, हावड़ा–न्यू जलपाईगुड़ी, हावड़ा–मालदा टाउन रूट पर चल रही वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के किराये, अन्य ट्रेनों से किराये के अंतर और आम लोगों की इस किराये को वहन करने की क्षमता जैसे कई मुद्दों पर अभिषेक ने संसद में रेल मंत्री से सवाल किया था। अश्विनी ने संसद में लिखित जवाब में बताया कि वंदे भारत ट्रेन में एसी–3 क्लास में जीएसटी छोड़कर प्रति किलोमीटर दूरी का किराया प्रति यात्री 2 रुपये 40 पैसे है। इस क्लास में 1000 किलोमीटर की यात्रा करने पर जीएसटी छोड़कर 2400 रुपये खर्च होते हैं। चीन, जापान और फ्रांस में इसी तरह की ट्रेनों में किराया प्रति यात्री प्रति किलोमीटर 7 रुपये से 20 रुपये तक है। दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में ट्रेन का किराया सबसे कम है।
जापान और फ्रांस से तुलना करने के बावजूद पूर्व या उत्तर भारत के निम्न मध्यवर्गीय लोगों की क्षमता के भीतर यह किराया आता है या नहीं, इस पर कोई आकलन किया गया है या नहीं, इसका कोई जवाब रेल मंत्री ने नहीं दिया। अश्विनी का कहना है कि रेलवे समाज के सभी वर्गों को सेवा देता है। समाज के अलग-अलग वर्गों की जरूरतों के अनुसार अलग-अलग श्रेणी की ट्रेनें चलाई जाती हैं। पिछड़े वर्गों के लिए कम किराये वाली ट्रेनें हैं और बेहतर सुविधाओं वाली ट्रेनें भी हैं। बेहतर सुविधाओं वाली ट्रेन में यात्रा करने के लिए अधिक किराया देना होगा, यह बात रेल मंत्री ने परोक्ष रूप से समझा दिया।
वंदे भारत स्लीपर में कौन-कौन सी बेहतर सुविधाएं हैं? अश्विनी के अनुसार आधुनिक कोच, बेहतर सुरक्षा, कवच व्यवस्था, उन्नत फायर सेफ्टी, सभी कोच में सीसीटीवी लगाए गए हैं। साथ ही झटके कम करने की व्यवस्था भी की गई है। अभिषेक ने सवाल किया कि इनकम लेवल, इस ट्रेन की मांग और अन्य ट्रेनों की संख्या को क्या इस प्रीमियम ट्रेन का किराया तय करते समय ध्यान में रखा गया था? जो किराया तय किया गया है, क्या वह मध्यवर्ग और निम्नवर्ग की क्षमता के भीतर है?
इन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब अश्विनी ने नहीं दिया। इन सवालों से बचते हुए केंद्र सरकार टिकटों पर दी जाने वाली सब्सिडी का आंकड़ा सामने रखा। रेल मंत्री के अनुसार 2024–25 वित्त वर्ष में यात्री किराये पर कुल 60239 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई है। टिकट किराये में औसतन 43 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। जिस सेवा को देने में रेलवे का खर्च 100 रुपये होता है, वहां यात्री को 57 रुपये देने पड़ते हैं।