पिछले 14 दिनों से पश्चिम एशियाई युद्ध को लेकर तनाव बना हुआ है। ऐसी परिस्थिति में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चौथी बार ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरघची (Abbas Araghchi) के साथ फोन पर बात की।
साउथ ब्लॉक सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पश्चिम एशियाई संघर्ष के बीच आंचलिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए दोनों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत की गयी है।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध का तनाव लगातार बढ़ते रहने की वजह से दो देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क को बेहतर बनाने की जरूरत है। बताया जाता है कि फोन पर हुई बातचीत के दौरान ईरान के विदेश मंत्री ने अमेरिका और इजरायल द्वारा शुरू किए गए युद्ध की नींदा की और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सभी संबंधित लोगों को इस मुद्दे पर एक होने का आह्वान किया।
इसके जवाब में भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता को बनाए रखना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने द्विपक्षीय व बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया और संघर्ष को कम करने की दिशा में सबको साथ मिलकर पहल करने की आवश्यकता के बारे में बात की।
इसके साथ ही बातचीत के दौरान वाणिज्यपथ में सुरक्षा और खासतौर पर होर्मूज जलसंधि से होकर आवाजाही करने वाले जहाजों का मुद्दा भी उठा। इस रास्ते से होकर विश्व भर में ईंधन की आपूर्ति होती है। इसलिए युद्ध की वजह से ईंधन की आपूर्ति और वाणिज्य पर इसका प्रभाव पड़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।
गौरतलब है कि भारत को ईरान ने होर्मूज जलसंधि से होकर जहाजों के जाने की अनुमति दी है। इसके विश्व वाणिज्य के क्षेत्र में भारत का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। जिस समय दुनिया के इक्का-दुक्का देशों के जहाज ही होर्मूज से होकर गुजर रहे हैं तब ईरान ने स्पष्ट रूप से कह दिया है कि होर्मूज जलसंधि भारतीय जहाजों की आवाजाही के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। इससे पहले गुरुवार को होर्मूज जलसंधि से होकर भारत एक मालवाही जहाज भी पहुंच चुका है। इस तरह से माना जा रहा है कि तेहरान भारत को अपना सच्चा दोस्त मान रहा है।