नयी दिल्लीः लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बंद्योपाध्याय ने देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की गिरावट को लेकर सवाल उठाया। उनका सवाल था कि भले ही देश की आर्थिक वृद्धि दर यानी GDP बढ़ रही है, लेकिन GDP के अनुपात में FDI लगातार घट रहा है। इसके जवाब में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण के सहयोगी पंकज चौधरी ने संसद में लिखित और मौखिक दोनों तरह से जानकारी दी।
पंकज चौधरी ने बताया कि 2020–21 में GDP के अनुपात में FDI 1.64 प्रतिशत था, जबकि 2024–25 में यह घटकर केवल 0.03 प्रतिशत हो गया। यह आंकड़ा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार पेश किया गया। पांच साल के डेटा में यह स्पष्ट है कि जीडीपी के अनुपात में एफडीआई लगातार कम हुआ है।
हालांकि, वर्ष-वार तुलना में देश में एफडीआई बढ़ा है। 2012–13 में कुल एफडीआई 34 बिलियन डॉलर था, जो 2025–26 में बढ़कर 50.36 बिलियन डॉलर हो गया। पिछले एक साल में एफडीआई में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
पंकज चौधरी ने वैश्विक संदर्भ भी पेश किया। उन्होंने कहा कि World Investment Report–2025 के अनुसार, 2024 में वैश्विक एफडीआई 2023 की तुलना में 11 प्रतिशत घटा। इसके बावजूद एशिया में स्थिति बेहतर रही। उदाहरण के लिए चीन में एफडीआई 29 प्रतिशत घटा, जबकि भारत में सिर्फ 2 प्रतिशत की गिरावट आई।
केंद्रीय मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारतीय कंपनियों ने इस समय विदेशों में बड़े निवेश किए हैं। ओवरसीज डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (ODI) बढ़ने से भारतीय कंपनियों का वैश्विक कारोबार मजबूत हुआ है और इस तरह भारत की अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ हो रही है। पंकज चौधरी ने कहा कि निवेश के लिए भारत एक उपयुक्त जगह बनता जा रहा है और विदेशी निवेशक इसे सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।
विश्लेषक मानते हैं कि जीडीपी के अनुपात में एफडीआई की गिरावट तकनीकी और वैश्विक संदर्भों के कारण हुई है, जबकि कुल निवेश स्तर में वृद्धि बनी हुई है। इसका मतलब यह है कि भारत में निवेश की कुल मात्रा बढ़ रही है, और देश की अर्थव्यवस्था विदेशी निवेश के लिहाज से आकर्षक बनी हुई है।