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आठ सांसदों के निलंबन रद्द करने की विपक्ष ने की मांग, सरकार और स्पीकर से अपील

विपक्ष ने संसद में सांसदों के निलंबन को रद्द करने के लिए केंद्रीय मंत्री और स्पीकर से की मुलाकात।

By श्वेता सिंह

Mar 13, 2026 13:58 IST

नयी दिल्लीः लोकसभा में बजट सत्र के पहले भाग में "अनुशासनहीन व्यवहार" के कारण निलंबित सात कांग्रेस और एक CPI-M सांसद के निलंबन को रद्द करने की मांग विपक्ष ने की है।

कांग्रेस के महासचिव के. सी. वेणुगोपाल, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, एनसीपी के सुप्रिया सुले, डीएमके की कानीमोजी और टीएमसी की शताब्दी रॉय ने पार्लियामेंट्री अफेयर्स मंत्री किरन रिजिजू (Kiren Rijiju) से मुलाकात कर आठ सांसदों के निलंबन रद्द करने की मांग की।

सूत्रों के अनुसार, रिजिजू ने विपक्ष को आश्वस्त किया कि वह इस मामले को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला (Om Birla) के साथ उठाएंगे।

बिजनेस एडवाइजरी कमिटी में फिर उठाया मुद्दा

शुक्रवार को बिजनेस एडवाइजरी कमिटी की बैठक में कांग्रेस के मुख्य व्हिप के. सुरेश (K. Suresh) ने भी इस मुद्दे को स्पीकर और रिजिजू के सामने दोबारा उठाया। सूत्रों के अनुसार, रिजिजू ने कहा कि विपक्ष से परामर्श के बाद उन्हें इस मामले पर अपडेट दिया जाएगा।

सात कांग्रेस और एक CPI-M सांसदों को 3 फरवरी 2026 को लोकसभा से निलंबित किया गया था। यह निलंबन तब लगाया गया जब सांसदों ने कागज फाड़कर चेयर की ओर फेंकने का आरोपित व्यवहार किया।

सस्पेंड सांसदों में शामिल हैं:

गुर्जीत सिंह औजला – कांग्रेस

हिबी ईडन – कांग्रेस

सी. किरण कुमार रेड्डी – कांग्रेस

अमरिंदर सिंह राजा वारिंग – कांग्रेस

मैनिकम टैगोर – कांग्रेस

प्रशांत पाडोले – कांग्रेस

डीन कुरियाकोज – कांग्रेस

एस. वेंकटेसन– CPI-M

सस्पेंड सांसद संसद के मकर द्वार के कदमों पर बैठकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्ष के वरिष्ठ नेता जैसे राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) समय-समय पर उनके समर्थन में शामिल हुए हैं।

विपक्ष और सरकार में टकराव जारी

सस्पेंड सांसदों का मामला विपक्ष और सरकार के बीच प्रमुख टकराव बना हुआ है। इसके अलावा, सूत्रों के अनुसार सरकार संभावित रूप से Rule 193 के तहत पश्चिम एशिया संकट और इसके भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव पर चर्चा करने के लिए भी सहमत हो सकती है। आने वाले दिनों में निलंबित सांसदों की वापसी और एलपीजी/ऊर्जा संकट जैसे मुद्दे लोकसभा में बहस का केंद्र बने रहेंगे।

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