नयी दिल्लीः देश में लगातार बढ़ते लापता बच्चों के मामलों को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वत: संज्ञान लिया है। हाल ही में प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने बिहार, ओडिशा, तेलंगाना, महाराष्ट्र और राजस्थान सरकारों को नोटिस जारी किया है।
इन राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों से दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। आयोग ने राज्यों से यह भी पूछा है कि लापता व्यक्तियों, खासकर बच्चों के मामलों से निपटने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और आगे इस समस्या से निपटने के लिए क्या रणनीति बनाई जा रही है।
एनएचआरसी ने स्पष्ट किया है कि यह मामला केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा है, क्योंकि बड़ी संख्या में लापता बच्चे बाद में शोषण का शिकार बन जाते हैं।
मीडिया रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई
दरअसल 9 मार्च 2026 को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट में इन पांच राज्यों में लापता व्यक्तियों, विशेष रूप से बच्चों के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि लापता बच्चों को खोजने की दर अपेक्षाकृत कम है। इसी रिपोर्ट को आधार बनाते हुए एनएचआरसी ने मामले को गंभीरता से लिया और संबंधित राज्य सरकारों से जवाब मांगा। आयोग ने राज्यों से राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजा आंकड़े भी साझा करने को कहा है।
बिहार में लापता बच्चों के आंकड़े
बिहार में लापता बच्चों की समस्या काफी गंभीर बनी हुई है। पिछले कई वर्षों से राज्य में हर साल बड़ी संख्या में बच्चे लापता हो रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013 से राज्य में हर साल लगभग 12,000 से 14,000 लापता व्यक्तियों के मामले दर्ज किए जा रहे हैं, जिनमें अधिकतर बच्चे शामिल हैं।
साल 2025 में बिहार में कुल 14,699 बच्चे लापता हुए थे। इनमें से 7,772 बच्चों को पुलिस ने ढूंढ लिया, जबकि 6,927 बच्चे अब भी लापता हैं। यानी बच्चों को खोजने की दर लगभग 53 प्रतिशत ही रही, जो प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
मानव तस्करी के मामलों ने बढ़ाई चिंता
एनसीआरबी के आंकड़े बताते हैं कि जिन राज्यों को नोटिस भेजा गया है, उनमें मानव तस्करी के मामले भी काफी ज्यादा हैं। ओडिशा नाबालिग लड़कों की तस्करी के मामलों में देश में सबसे आगे बताया गया है, जबकि बिहार दूसरे स्थान पर है। वहीं राजस्थान नाबालिग लड़कियों की तस्करी के मामलों में शीर्ष पर है।
महाराष्ट्र और तेलंगाना भी कुल मानव तस्करी के मामलों में प्रमुख राज्यों में शामिल हैं। इन राज्यों में बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों को तस्करी के जरिए विभिन्न अवैध गतिविधियों में धकेले जाने की आशंका रहती है।
2023 के एनसीआरबी आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र में 388, तेलंगाना में 336 और ओडिशा में 162 मानव तस्करी के मामले दर्ज किए गए थे। वहीं हाल के अनुमानों के मुताबिक 2025 में महाराष्ट्र में 396, तेलंगाना में 343 और ओडिशा में 165 मामले सामने आए हैं।
देशभर में हर साल हजारों बच्चे लापता
राष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक है। एनसीआरबी के 2023-2024 के आंकड़ों के अनुसार देश में हर साल 90,000 से अधिक बच्चे लापता हो रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इनमें से कई बच्चे बाल मजदूरी, भीख मंगवाने, जबरन श्रम, यौन शोषण या अन्य आपराधिक गतिविधियों के जाल में फंस जाते हैं। ऐसे मामलों में बच्चों के मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन होता है।
राज्यों को ठोस कदम उठाने की सलाह
एनएचआरसी का कहना है कि लापता बच्चों की समस्या को केवल पुलिस कार्रवाई से नहीं बल्कि व्यापक सामाजिक सहयोग से ही नियंत्रित किया जा सकता है।
आयोग ने राज्यों से अपेक्षा जताई है कि वे लापता बच्चों की तलाश के लिए बेहतर तकनीकी व्यवस्था, विशेष जांच दल और जागरूकता अभियान जैसे कदम उठाएं। साथ ही मानव तस्करी के गिरोहों पर सख्त कार्रवाई की जरूरत भी बताई गई है।
एनएचआरसी को उम्मीद है कि राज्यों से मिलने वाली रिपोर्ट के आधार पर इस समस्या की जड़ तक पहुंचकर ठोस समाधान निकाला जा सकेगा और बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।