नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब दुनिया के तेल बाजार पर दिखने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य कुछ हफ्तों तक बंद रहता है तो कच्चे तेल की कीमत बहुत तेजी से बढ़ सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले चार से आठ हफ्तों में कच्चा तेल 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है।
दरअसल हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। इस रास्ते से हर दिन लगभग 2 करोड़ बैरल तेल दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है। अगर यह रास्ता बंद हो जाता है तो तेल की आपूर्ति कम हो जाएगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस इलाके में समुद्री जहाजों की आवाजाही पहले ही बहुत कम हो गई है। इससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। शुरुआत में बाजार को लगा था कि समस्या केवल दो हफ्ते तक रहेगी लेकिन अब माना जा रहा है कि यह संकट ज्यादा समय तक चल सकता है।
अगर यह स्थिति चार से आठ हफ्ते तक बनी रहती है तो कच्चे तेल की कीमत 110 से 150 डॉलर प्रति बैरल के बीच पहुंच सकती है। हालांकि कीमत बहुत ज्यादा बढ़ने पर तेल की मांग भी कम हो सकती है। ऐसे में कई देश वैकल्पिक आपूर्ति के रास्ते भी तलाश सकते हैं।
कुछ देश अपने रणनीतिक तेल भंडार का उपयोग कर सकते हैं। अगर करीब 30 से 40 करोड़ बैरल तेल बाजार में छोड़ा जाता है तो थोड़े समय के लिए राहत मिल सकती है लेकिन बाद में इन भंडारों को फिर से भरना भी पड़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर एशिया के देशों पर पड़ सकता है। चीन, भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को जाने वाला काफी तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
भारत के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। फिलहाल कच्चे तेल की आपूर्ति संभाली जा सकती है लेकिन गैस और एलपीजी की कीमतें बढ़ सकती हैं। अगर संकट लंबा चला तो ऊर्जा बाजार पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।