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फरवरी में महंगाई की मार से गृहस्थों की जेब पर दबाव

सांख्यिकी विभाग ने फरवरी में वस्तुओं के खुदरा दामों में वृद्धि के आंकड़े जारी किए।

नई दिल्ली : पश्चिम एशिया में संघर्ष की तीव्रता बढ़ते ही गृहस्थों की जेब पर दबाव बढ़ाते हुए घरेलू और वाणिज्यिक एलपीजी (LPG) की कीमत क्रमशः 60 रुपये और 114.50 रुपये बढ़ाई है केंद्र ने। गुरुवार को राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा जारी आंकड़ों ने उस परेशानी को और कुछ बढ़ा दिया। इस दिन राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने फरवरी में वस्तुओं के खुदरा दामों में वृद्धि के आंकड़े प्रकाशित किए। उसमें देखा जा रहा है कि पिछले महीने वस्तुओं के खुदरा दामों में वृद्धि की दर जनवरी के संशोधित आंकड़े 2.74 प्रतिशत से काफी बढ़कर 3.21 प्रतिशत हो गई है। वस्तुओं के खुदरा दामों में वृद्धि की दर रिजर्व बैंक (RBI) की राहत सीमा के भीतर रहने के बावजूद उसकी मासिक वृद्धि चिंता का कारण है। खासकर तब जब पश्चिम एशिया में ईरान बनाम यूएस इजरायल का युद्ध अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव बना रहा है।

सांख्यिकी विभाग के आंकड़े बताते हैं कि फरवरी में ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई का दबाव शहरों की तुलना में अधिक था। उस महीने ग्रामीण इलाकों में वस्तुओं के खुदरा दामों में वृद्धि की दर 3.37 प्रतिशत रही जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.02 प्रतिशत थी। साथ ही समग्र उपभोक्ता मूल्य सूचकांक भी थोड़ा बढ़ा है। जनवरी में जहां सीपीआई सूचकांक 104.45 प्वाइंट पर था फरवरी में बढ़कर 104.57 प्वाइंट हो गया। यानी विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों में कुल मिलाकर बढ़ोतरी बनी हुई है।

खाद्य पदार्थों की कीमतों में फरवरी में तुलनात्मक रूप से अधिक दबाव देखा गया। कंज़्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) के अनुसार खाद्य पदार्थों की महंगाई फरवरी में बढ़कर 3.47 प्रतिशत हो गई जो जनवरी में केवल 2.13 प्रतिशत थी। इसलिए एक महीने के अंतर में खाद्य पदार्थों की कीमत बढ़ने की प्रवृत्ति स्पष्ट हुई है। सरकार की ओर से बताया गया है कि फरवरी महीने में वार्षिक महंगाई दर लगभग 47 बेसिस प्वाइंट या 0.47 प्रतिशत बढ़ी है। हालांकि सभी खाद्य पदार्थों की कीमत समान रूप से नहीं बढ़ी। कुछ सब्जियों के मामले में उल्टा कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट भी देखी गई। सरकारी आंकड़ों के अनुसार फरवरी में टमाटर, मटर और फूलगोभी की कीमत जनवरी की तुलना में 10 प्रतिशत से भी ज्यादा कम हो गई।

राज्यवार आंकड़ों में भी कुछ अंतर दिखाई दिया है। 50 लाख से अधिक जनसंख्या वाले राज्यों में तेलंगाना में महंगाई दर सबसे अधिक 5.02 प्रतिशत रही। इसके बाद राजस्थान (3.53 प्रतिशत), केरल (3.50 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (3.45 प्रतिशत) और पश्चिम बंगाल (3.44 प्रतिशत) का स्थान है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने बताया कि पूरे देश में 1,407 शहरी बाजारों और 1,465 ग्रामीण बाजारों से नियमित रूप से जानकारी एकत्र कर यह आंकड़े तैयार किए गए हैं।

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