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‘इकोपल्स’ तकनीक से दिल की जांच आसान, डॉक्टरों को मिलेगा नया डिजिटल सहारा

IIT धनबाद की बड़ी उपलब्धि, AI-VR डिवाइस से होगी हृदय रोग की तेज पहचान

By प्रियंका महतो

Apr 25, 2026 18:48 IST

रांची : हृदय रोगों की पहचान को तेज और अधिक सटीक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी उपलब्धि सामने आई है। आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के एक प्रोफेसर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और वर्चुअल रियलिटी (वीआर) आधारित एक ऐसा उपकरण विकसित किया है जो डॉक्टरों को हृदय की जांच अधिक तेजी और सटीकता से करने में मदद कर सकता है। यह उपकरण एसीएस राव ने विकसित किया है जो कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग से जुड़े हैं। इस डिवाइस का नाम ‘इकोपल्स’ रखा गया है।

जारी बयान के अनुसार यह उपकरण हृदय से संबंधित स्कैन इमेज का विश्लेषण करता है और उनमें मौजूद पैटर्न को स्वयं समझने की क्षमता रखता है। इसके जरिए डॉक्टर यह आकलन कर सकते हैं कि हृदय किस प्रकार कार्य कर रहा है वह भी बिना धीमी मैनुअल प्रक्रियाओं पर अधिक निर्भर हुए। इस तकनीक की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि यह पारंपरिक एआई प्रणालियों की तरह बड़े पैमाने पर पहले से लेबल किए गए मेडिकल डेटा पर निर्भर नहीं रहती जिससे समय की बचत होती है और प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है। उपकरण में वर्चुअल रियलिटी का उपयोग भी किया गया है जिससे डॉक्टर और शोधकर्ता हृदय की गतिविधियों को इंटरैक्टिव 3डी स्वरूप में देख सकते हैं। इससे हृदय की स्थिति को समझना अधिक आसान हो जाता है।

प्रोफेसर एसीएस राव के अनुसार यह प्रणाली सीधे हृदय स्कैन डेटा का विश्लेषण कर महत्वपूर्ण संकेतों की पहचान स्वतः कर सकती है। इसमें ‘एक्सप्लेनेबल एआई’ तकनीक का भी उपयोग किया गया है जिसका मतलब है कि डॉक्टर यह समझ सकते हैं कि सिस्टम अपने निष्कर्ष तक कैसे पहुंचता है न कि इसे एक ‘ब्लैक बॉक्स’ की तरह मानना पड़े। इकोपल्स’ हृदय की कार्यक्षमता से जुड़े महत्वपूर्ण क्लिनिकल मापदंडों का आकलन कर सकता है जैसे कि हृदय कितनी कुशलता से रक्त पंप कर रहा है। इससे रोग की शुरुआती पहचान और उपचार की योजना बनाने में सहायता मिल सकती है।

एसीएस राव ने कहा कि जटिल मेडिकल डेटा को स्पष्ट जानकारी में बदलकर यह तकनीक उन्नत हृदय जांच को अधिक सुलभ बना सकती है विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां चिकित्सा संसाधन सीमित हैं। इस परियोजना को अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की ओर से लगभग 47 लाख रुपये का शोध अनुदान प्राप्त हुआ है।

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