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कर्नाटक में 35 मोरों की रहस्यमयी मौत, वन विभाग ने शुरू की जांच

एक सप्ताह में अलग-अलग गांवों से मिले 35 मोरों के शव

By प्रियंका महतो

Apr 25, 2026 13:32 IST

टुमकुरु : कर्नाटक में बड़ी संख्या में मोरों की मौत ने चिंता और रहस्य दोनों बढ़ा दिए हैं। एक सप्ताह के भीतर 35 मोरों के शव मिलने के बाद वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। ये सभी शव टुमकुरु जिला से बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक तौर पर वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि अत्यधिक गर्मी और पानी की कमी इस घटना के पीछे मुख्य कारण हो सकते है हालांकि अन्य संभावनाओं की भी जांच की जा रही है।

वन विभाग के सूत्रों के अनुसार टुमकुरु के ग्रामीण इलाकों में एक सप्ताह के अंतराल में करीब 35 मोरों की मौत हुई है। इनमें उर्दिगेरे होबली के बोम्मनहल्ली और कोलिहल्ली गांवों के साथ-साथ गुलुर होबली के बैरासांद्रा और हुलेनहल्ली गांवों के खेतों में 11 राष्ट्रीय पक्षियों के शव पाए गए। ये शव एक-दूसरे से लगभग 500 मीटर से 1 किलोमीटर की दूरी पर मिले हैं। इतनी बड़ी संख्या में मोरों की मौत के पीछे भीषण गर्मी को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है। वन विभाग के अधिकारी मौके का निरीक्षण कर चुके हैं। उनका प्राथमिक अनुमान है कि तेज गर्मी और जल की कमी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई हो सकती है हालांकि मौत के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए नमूने बेंगलुरु भेजे गए हैं। इसके साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं किसी प्रकार के विषाक्त पदार्थ के कारण तो इन पक्षियों की मौत नहीं हुई।

अधिकारियों ने यह भी बताया कि आसपास स्थित पत्थर खदानों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को जिन जलाशयों में डाला जाता है उनके नमूनों को भी परीक्षण के लिए भेजा गया है। इससे यह स्पष्ट करने की कोशिश की जा रही है कि जल स्रोतों में किसी प्रकार का प्रदूषण तो नहीं है। हालांकि प्रारंभिक जांच में विषाक्तता की संभावना कम लग रही है फिर भी सभी संभावित कारणों को ध्यान में रखते हुए विस्तृत जांच जारी है। इस मामले में क्षेत्रीय वन अधिकारी जी आर शशिधर ने बताया कि मोरों की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जांच के आदेश दे दिए गए है और रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में कर्नाटक के कई हिस्सों में तापमान 39 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया है, जिससे वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका बढ़ गई है। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष अगस्त में भी टुमकुरु के एक जलाशय के पास लगभग 20 मोरों के शव मिले थे। उस समय जानकारी सामने आई थी कि कीटों से बचाव के लिए डाले गए कीटनाशक युक्त बीज खाने के कारण उनकी मौत हुई थी।

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