पटना: रखरखाव और पुनर्वास के लिए उचित व्यवस्था करने का आदेश कोलकाता हाई कोर्ट ने दिया था लेकिन अंततः उस निर्देश का पालन नहीं हुआ। इसी लापरवाही की कीमत चुकानी पड़ी बिहार के सिवान में बंद मादा हाथी सुमन को। पशु संरक्षण कार्यकर्ताओं का आरोप है कि अदालत के निर्देश की अवहेलना के कारण ही यह दर्दनाक परिणाम हुआ। सिवान में और दो हाथियों को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने की भी मांग की गई है।
सुमन, भोला और बसंती, ये तीनों हाथी पहले पश्चिम बंगाल के नटराज सर्कस में प्रदर्शन करते थे। पशु संरक्षण कानून के तहत सर्कस में जानवरों के उपयोग पर रोक लगने के बाद इन्हें पश्चिम बंगाल से बिहार ले जाया गया। पशुओं के हित में काम करने वाली संस्था केप फाउंडेशन ने इस हस्तांतरण को अवैध बताते हुए कोलकाता हाईकोर्ट में मामला दर्ज किया था। अदालत ने तीनों हाथियों के शीघ्र पुनर्वास का आदेश भी दिया था। वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर की सुपर्णा गंगोपाध्याय ने कहा कि सुमन की मौत बेहद दर्दनाक है। अदालत के आदेशों के पालन में देरी का गंभीर परिणाम सामने आया। यदि आवश्यक कदम तुरंत नहीं उठाए गए तो बाकी दो हाथियों की भी हालत गंभीर हो सकती है।
फेडरेशन ऑफ इंडियन एनिमल प्रोटेक्शन ऑर्गेनाइजेशन ने भी कहा कि अदालत ने इन हाथियों को पश्चिम बंगाल वन विभाग को लौटाने और सुरक्षित पुनर्वास केंद्र में भेजने के लिए कई बार निर्देश दिए थे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। हाल ही में एक वीडियो में दिखाया गया कि सुमन को बीमार अवस्था में भी वाणिज्यिक कार्यों में इस्तेमाल किया जा रहा था। इस घटना ने बंदी जानवरों की देखभाल, चिकित्सा और सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ अदालत के निर्देशों को लागू करने की मानसिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पशु संरक्षण संस्थाओं ने पश्चिम बंगाल और बिहार प्रशासन से अपील की है कि भोला और बसंती को तुरंत सुरक्षित स्थान पर भेजकर उचित पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।