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खेलो इंडिया में बंगाल को दिलाया स्वर्ण, अब खेतों में मजदूरी करने को मजबूर हुई संजिता उरांव

पिता के घायल होने के बाद परिवार चलाने के लिए खेतों में काम कर रही हैं युवा एथलीट।

कोलकाता : करीब डेढ़ महीने पहले तक संजिता उरांव ने पूरे बंगाल का नाम रोशन किया था। छत्तीसगढ़ में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स की एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उत्तर बंगाल के नक्सलबाड़ी की रहने वाली 21 वर्षीय संजिता ने पश्चिम बंगाल के लिए एकमात्र स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने 10 हजार मीटर दौड़ में पहला स्थान हासिल कर बड़ी उपलब्धि अपने नाम की थी।

इस सफलता के बाद संजिता ने बेहतर प्रशिक्षण और पौष्टिक भोजन की मदद से खुद को और मजबूत बनाकर राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने का सपना देखना शुरू कर दिया था।

लेकिन केवल डेढ़ महीने के भीतर ही एक बेहतर एथलीट बनने का उनका सपना टूटता हुआ दिखाई देने लगा है। उनके पिता विजय उरांव दिहाड़ी मजदूरी करके परिवार का पालन-पोषण करते थे। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद वह अपनी बेटी को एथलीट बनाने की पूरी कोशिश कर रहे थे।

कुछ सप्ताह पहले पेड़ काटने के दौरान गंभीर हादसे में उनकी कमर टूट गई जिसके बाद वह बिस्तर पर पड़ गए। परिवार की ऐसी स्थिति में संजिता की मां रीता उरांव ने चाय बागान में काम करना शुरू किया लेकिन पांच सदस्यों के परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया।

ऐसे हालात में संजिता ने खुद खेतों में मजदूरी करने का फैसला किया। वह सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे तक खेतों में खेती से जुड़ा काम कर रही हैं और इसके बदले उन्हें प्रतिदिन 250 रुपये मिलते हैं।

शुक्रवार दोपहर खेत में काम करने के दौरान फोन पर बातचीत में संजिता ने कहा कि यहां वैसे भी अभ्यास के लिए अच्छा मैदान नहीं है। ट्रेनिंग के लिए काफी दूर जाना पड़ता है। लेकिन परिवार की हालत ऐसी हो गई है कि मुझे खेल छोड़कर कमाने के लिए काम करना पड़ रहा है। जल्द ही कोलकाता में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता होने वाली है लेकिन शायद मैं उसमें हिस्सा भी नहीं ले पाऊंगी।

उन्होंने आगे कहा कि खेलो इंडिया में स्वर्ण पदक जीतने के बाद कई लोगों ने कहा था कि मुझे स्टाइपेंड मिलेगा लेकिन अब तक कुछ नहीं मिला। राज्य सरकार की ओर से भी कोई सहायता नहीं मिली और न ही कोई पुरस्कार मिला।

हालांकि पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद संजिता को कुछ उम्मीद दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि उत्तर बंगाल में खेल सुविधाओं की स्थिति पहले से ही काफी खराब है। लेकिन हमारे उत्तर बंगाल के ही रहने वाले निशीथ प्रमाणिक अब खेल मंत्री बने हैं इसलिए उम्मीद बढ़ी है।

बताया जा रहा है कि पिछली राज्य सरकार ने खेलो इंडिया गेम्स को ज्यादा महत्व नहीं दिया था। इसी वजह से संजिता जैसी खिलाड़ियों की उपलब्धियों को सामने लाने के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं किया गया।

अब एथलेटिक्स जगत को उम्मीद है कि पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार संजिता उरांव जैसे खिलाड़ियों के सपनों को पूरा करने के लिए ठोस कदम उठाएगी।

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