नई दिल्ली : स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने उस भावुक पल को याद किया जब रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने आखिरकार 18 वर्षों के इंतजार के बाद इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का खिताब अपने नाम किया। उन्होंने कहा कि कई वर्षों की निराशा और दिल टूटने वाले अनुभवों के बाद ट्रॉफी जीतने का एहसास शुरुआती वर्षों में खिताब जीतने की तुलना में कहीं अधिक विशेष था।
आरसीबी ने 2025 में पंजाब किंग्स को फाइनल में हराकर अपना पहला आईपीएल खिताब जीता। इसके साथ ही लीग की सबसे लोकप्रिय फ्रेंचाइजियों में से एक के लंबे समय से चले आ रहे इंतजार और कई बार बेहद करीब पहुंचकर चूक जाने का सिलसिला समाप्त हुआ। वर्ष 2008 में आईपीएल के पहले सत्र से ही बेंगलुरु फ्रेंचाइजी का हिस्सा रहे विराट कोहली ऐतिहासिक जीत के बाद बेहद भावुक दिखाई दिए।
आरसीबी पॉडकास्ट में बातचीत करते हुए कोहली ने फाइनल के अंतिम क्षणों को याद किया। उस समय तेज गेंदबाज जॉश हेजलवुड आखिरी ओवर फेंक रहे थे और पंजाब किंग्स को जीत के लिए 29 रन की जरूरत थी।
कोहली ने कहा कि मैंने खुद को बहुत आभारी महसूस किया। सच कहूं तो मैं अपनी जिंदगी में हर दिन खुद को शुक्रगुजार मानता हूं। मुझे किसी बात की शिकायत नहीं है। लेकिन उस रात खास तौर पर और आज भी, लोगों को शब्दों में यह समझाना बहुत मुश्किल है कि आखिरी ओवर की अंतिम चार गेंदों के दौरान मैं कैसा महसूस कर रहा था।
उन्होंने आगे कहा कि जब आप बाहर से देखते हैं कि इस फ्रेंचाइजी के साथ क्या-क्या हुआ आरसीबी को इतने वर्षों तक एक बड़ी टीम और बड़ी फ्रेंचाइजी के रूप में देखा गया जिसने कभी खिताब नहीं जीता। ऐसी टीम जो हमेशा करीब पहुंची लेकिन ट्रॉफी अपने नाम नहीं कर सकी। इतने वर्षों तक लगातार यह दबाव बनता गया। हर सीजन के साथ यह और बढ़ता गया। इसे बाहर से देखना अलग बात है और इसे जीना बिल्कुल अलग। मैंने उन सभी सीजनों को जिया है।
अपनी भावनाओं पर बात करते हुए कोहली ने स्वीकार किया कि लंबे इंतजार ने इस जीत को और भी ज्यादा यादगार बना दिया।
उन्होंने कहा कि मैं पूरी ईमानदारी और स्पष्टता के साथ कह सकता हूं कि अगर हमने शुरुआती वर्षों में ट्रॉफी जीत ली होती तो शायद मुझे उस भावना का पांच प्रतिशत भी अनुभव नहीं होता जो इस बार हुआ। इतने वर्षों का तनाव, इतना दबाव, और फिर 18 साल बाद यह सब हासिल होना। मेरे क्रिकेट करियर में भारत के लिए खेलने के दौरान मिले अनुभवों को छोड़ दें तो इससे बेहतर अनुभव कोई नहीं हो सकता था। यह मेरे लिए बेहद खास था।
विराट कोहली लगभग दो दशकों से इस फ्रेंचाइजी का चेहरा रहे हैं। वह आईपीएल इतिहास में सबसे अधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं। उनके नाम 9,145 रन दर्ज हैं जिनमें रिकॉर्ड नौ शतक शामिल हैं।
आरसीबी के पूर्व कप्तान ने फ्रेंचाइजी के साथ अपने लंबे सफर और उस भरोसे को भी याद किया, जो उनके करियर के अहम मोड़ पर टीम प्रबंधन ने उन पर जताया था। 2011 सीजन से पहले बेंगलुरु ने उन्हें अकेले रिटेन किया था।
कोहली ने कहा कि जैसा कि सभी जानते हैं मैंने आरसीबी के साथ बहुत कम उम्र में अपना सफर शुरू किया था। फिर मेरे करियर के बेहद अहम दौर में मुझे रिटेन किया गया। उस समय काफी बातचीत हुई थी। आरसीबी ने मेरे करियर और मेरे खेल को लेकर मेरे नजरिए को समझा क्योंकि मैं भारत के लिए भी खेल रहा था। उन्होंने मुझ पर भरोसा दिखाया। 2011 में मैं अकेला रिटेन किया गया खिलाड़ी था और उसके बाद टीम को मेरे आसपास तैयार किया गया।
कोहली ने उन विदेशी दिग्गज खिलाड़ियों का भी जिक्र किया, जिन्होंने वर्षों तक फ्रेंचाइजी के लिए खेलते हुए टीम से गहरा भावनात्मक जुाव महसूस किया। उन्होंने एबी डिविलियर्स और क्रिस गेल जैसे खिलाड़ियों का नाम लिया।
उन्होंने कहा कि फिर एबी, क्रिस गेल और उन सभी प्रतिष्ठित खिलाड़ियों की भागीदारी रही जिन्होंने इतने वर्षों तक टीम के लिए खेला। स्वाभाविक रूप से वे भी उस दबाव और उम्मीदों को महसूस करने लगे। जब आप खुद को किसी एक टीम के लिए इतना समर्पित कर देते हैं और वह टीम आपसे बहुत कुछ मांगती है तो भावनात्मक जुड़ाव अपने आप बन जाता है। आरसीबी से हमेशा उम्मीदें बहुत ऊंची रही हैं। जब लोग अपना इतना कुछ किसी चीज को दे देते हैं तो उससे सच्चा लगाव और भावनात्मक संबंध बनना स्वाभाविक है।”
उन्होंने आगे कहा कि 18 वर्षों के दौरान मैंने शायद किसी भी अन्य खिलाड़ी से अधिक उस प्रभाव को महसूस किया, उस आखिरी साल तक जब हमने ट्रॉफी जीती। मुझे लगता है कि वे सारी भावनाएं उसी पल बाहर आ गईं जब मैं घुटनों पर बैठ गया, हाथ जोड़ लिए और बस शुक्रिया कहा कि संन्यास लेने से पहले मैं यह अनुभव कर सका।
आईपीएल की मौजूदा चैंपियन आरसीबी 2026 सीजन में भी शानदार प्रदर्शन कर रही है। बेंगलुरु की टीम 12 मैचों में आठ जीत के साथ अंक तालिका में शीर्ष पर है। वहीं विराट कोहली ने एक बार फिर टीम का नेतृत्व करते हुए 53.78 की औसत और 165 के स्ट्राइक रेट से 484 रन बनाए हैं।