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“विश्व कप फाइनल के बाद नहीं सोचा था कि टीम से बाहर हो जाऊंगा”, अक्षर पटेल के मन में रह गया मलाल

एमएस धोनी की सलाह से ही अक्षर पटेल को अपना खोया हुआ आत्मविश्वास वापस मिला था।

By तानिया रॉय, Posted by: रजनीश प्रसाद

Jan 10, 2026 15:56 IST

नयी दिल्ली : भारतीय ऑलराउंडर अक्षर पटेल को अगले महीने होने वाले टी-20 विश्व कप के लिए टीम का उपकप्तान चुना गया है। लंबे समय तक उन्हें केवल बैकअप खिलाड़ी के रूप में देखा गया लेकिन इस बार वह नेतृत्व समूह का अहम हिस्सा बन गए हैं। हालांकि इस मुकाम तक पहुंचने का सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा।

अक्षर का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट सफर 2015 विश्व कप से शुरू हुआ था जहां टीम में शामिल होने के बावजूद उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला। इसके बाद उनके करियर में और भी कठिन दौर आए। 2021 टी-20 विश्व कप और 2023 वनडे विश्व कप के लिए टीम में नाम घोषित होने के बावजूद अंतिम समय में उन्हें बाहर कर दिया गया।

उन दिनों को याद करते हुए अक्षर कहते हैं कि वह समय बेहद कठिन था। आज मैं जो कुछ भी हूं उन्हीं अनुभवों की वजह से हूं। 2018 में बाहर होने के बाद 2021 में जब दोबारा टीम में लौटा तब मैंने सीखा कि मुश्किल हालात में सकारात्मक कैसे रहा जाता है। उसी अनुभव की बदौलत पिछले टी-20 विश्व कप फाइनल में दबाव के बावजूद मैं शांत रह सका।

2018 में टीम से बाहर होने के बाद अक्षर ने अपनी बल्लेबाजी पर कड़ी मेहनत शुरू की। इस दौरान एमएस धोनी की सलाह ने उनके आत्मविश्वास को नई दिशा दी। धोनी ने उन्हें समझाया कि वह खुद पर जरूरत से ज्यादा दबाव डालते हैं जबकि असली ताकत अपनी क्षमता पर भरोसा रखने में है। धोनी की यह बात अक्षर के दिल में बस गई और उन्होंने धीरे-धीरे दबाव से बाहर निकलकर खुद पर विश्वास करना सीख लिया। यही सीख उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई।

2024 टी-20 विश्व कप फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 31 गेंदों पर 47 रन की अहम पारी खेलकर अक्षर ने साबित कर दिया कि वह किसी के विकल्प नहीं बल्कि अपनी जगह खुद बना चुके हैं। अक्षर ने कहा कि उसके बाद मुझे जडेजा भाई के विकल्प के तौर पर नहीं देखा गया। हमारी टीम में अलग-अलग भूमिकाएं थीं। मैंने कभी जडेजा भाई से प्रतिस्पर्धा नहीं की। अभ्यास में हमेशा यही सोचता था कि अपने खेल में क्या नया जोड़ूं ताकि टीम से बाहर न होना पड़े। टी-20 विश्व कप फाइनल के बाद मैंने कभी नहीं सोचा था कि मुझे टीम से बाहर किया जाएगा।

अब अक्षर सिर्फ स्पिन गेंदबाज नहीं बल्कि टीम की बल्लेबाजी में भी अहम जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उनका मानना है कि उन्हें ऊपर भेजा जाना टीम के भरोसे का प्रतीक है। वह कहते हैं कि मैं फ्लोटर बल्लेबाज नहीं हूं मुझे विशेषज्ञ बल्लेबाज की तरह जिम्मेदारी दी जाती है। अक्षर की यह यात्रा बताती है कि निराशा और अस्वीकृति से उबरकर किस तरह एक खिलाड़ी अपने दम पर टीम में मजबूत पहचान बना सकता है।

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