कोलकाताः पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले चरण से पहले चुनाव आयोग ने एक अहम और प्रतीकात्मक कदम उठाते हुए महिला सशक्तिकरण का स्पष्ट संदेश दिया है। इस चरण में राज्यभर के 5,644 पोलिंग स्टेशनों की पूरी जिम्मेदारी महिला कर्मियों को सौंपी गई है। इसके साथ ही मतदाताओं को बेहतर अनुभव देने के लिए 220 मॉडल पोलिंग स्टेशन भी तैयार किए गए हैं।
गुरुवार 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के मतदान में 152 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इस चरण में ही चुनाव आयोग ने यह पहल लागू कर चुनाव प्रक्रिया को अधिक समावेशी और सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। यह व्यवस्था उत्तर बंगाल से लेकर जंगली महल तक कई जिलों में लागू की गई है।
जिलावार आंकड़ों में मालदा के इंग्लिशबाजार में सबसे अधिक 160 महिला संचालित बूथ बनाए गए हैं। इसके बाद मुर्शिदाबाद के बहरमपुर में 156 और पूर्व मेदिनीपुर के तमलुक में 140 बूथ पूरी तरह महिलाओं के जिम्मे होंगे। इसके अलावा रायगंज, कूचबिहार दक्षिण, जलपाईगुड़ी और पुरुलिया में भी बड़ी संख्या में महिला संचालित बूथ बनाए गए हैं।
मतदान को अधिक सुविधाजनक और मतदाता-अनुकूल बनाने के लिए तैयार किए गए 220 मॉडल पोलिंग स्टेशनों पर साफ-सफाई, पीने के पानी, बैठने की व्यवस्था के साथ-साथ दिव्यांग मतदाताओं के लिए रैंप और व्हीलचेयर जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी। पुरुलिया के बलरामपुर में सबसे अधिक 6 मॉडल बूथ बनाए गए हैं।
प्रशासन का मानना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और सहज बनाना है। खासकर महिला मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें प्रेरित करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बार चुनावी प्रक्रिया में ‘नारी शक्ति’ की सक्रिय और स्पष्ट भागीदारी ही सबसे बड़ा संदेश बनकर उभर रही है।