नई दिल्ली: इंडियन एयर फोर्स के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने इतिहास रचते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया। 26 जनवरी, 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें ‘अशोक चक्र’ अवॉर्ड से सम्मानित किया। इस सम्मान समारोह में उनकी पत्नी कामना शुक्ला भी उपस्थित थीं। अवॉर्ड लेते समय कामना की आंखों में गर्व और खुशी झलक रही थी। अवॉर्ड मिलने से पहले शुभांशु शुक्ला ने मीडिया से कहा, “मैं बेहद खुश और सम्मानित महसूस कर रहा हूं।”
शुभांशु ने जून 2025 में 18 दिनों के लिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) की यात्रा की थी। वे स्पेस जाने वाले दूसरे भारतीय हैं और NASA के Axiom-4 क्रू के अहम सदस्य थे। इस मिशन में उन्होंने माइक्रोग्रैविटी पर कई वैज्ञानिक प्रयोग किए, जिनके परिणाम ने न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तारीफ बटोरी।
वर्तमान में भारत 2027 में देसी टेक्नोलॉजी के माध्यम से अंतरिक्ष यात्रियों को भेजने की तैयारी कर रहा है, और शुभांशु इस महत्वाकांक्षी योजना के अग्रणी चेहरों में शामिल हैं। उनके योगदान को देखते हुए इस बार उन्हें देश का सर्वोच्च सैन्य सम्मान अशोक चक्र दिया गया।
पर्सनल लाइफ और बैकग्राउंड
शुभांशु शुक्ला उत्तर प्रदेश के लखनऊ के रहने वाले हैं। उन्होंने वहीं अपनी स्कूली और उच्च शिक्षा पूरी की। 16 साल की उम्र में NDA में चुने जाने के बाद उन्होंने एयर फोर्स में शामिल होकर MiG-21, MiG-29 और सुखोई 30 MKI जैसे लड़ाकू विमानों का संचालन किया। उनके पास 2,000 घंटे उड़ाने का अनुभव है। मार्च 2024 में उन्हें ग्रुप कैप्टन के पद पर प्रमोट किया गया।
कामना और शुभांशु की कहानी बचपन की दोस्ती से शुरू हुई थी। दोनों लखनऊ के एक मोंटेसरी स्कूल में तीसरी क्लास से साथ पढ़ते थे। 2009 में उन्होंने शादी की। कामना के अनुसार, सुभांशु शांत स्वभाव के हैं और लंबे समय से उनका सपना स्पेस में जाने का था।
इस अवॉर्ड समारोह में सुभांशु और कामना की जोड़ी देशवासियों के लिए प्रेरणा बन गई। उनके अंतरिक्ष मिशन और अवॉर्ड ने भारतीयों के लिए गर्व का नया क्षितिज खोल दिया।