नई दिल्ली: लोकसभा के स्पीकर ओम बिड़ला पर विपक्षी दलों के अधिकांश राजनीतिक दलों ने यह आरोप लगाया है कि वे निष्पक्षता से सदन का संचालन नहीं कर रहे हैं। उन पर सत्तापक्ष के प्रति अत्यधिक झुकाव और पक्षपात करने का गंभीर आरोप लगाया गया है। इन आरोपों के आधार पर विपक्ष ने स्पीकर को हटाने की मांग की है।
स्पीकर को हटाने के लिए विपक्ष की ओर से ‘मोशन फॉर रिमूवल’ का नोटिस संसदीय सचिवालय में जमा किया गया है, जिस पर 118 विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव से तृणमूल कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने सिद्धांततः दूरी बनाई है।
संसदीय नियमों के अनुसार ‘मोशन फॉर रिमूवल’ का नोटिस पेश होने के कम से कम 20 दिन बाद उस पर मतदान किया जा सकता है। रविवार को संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू ने बताया कि इस प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण के पहले दिन यानी 9 मार्च को होगा।
उन्होंने कहा, “संसदीय नियमों के अनुसार अवकाश के बाद सत्र शुरू होने के पहले दिन इस विषय पर चर्चा करनी होती है। 9 मार्च को लोकसभा में स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी और पक्ष-विपक्ष में मतदान कराया जाएगा।”
9 मार्च से शुरू होने वाला दूसरा चरण 2 अप्रैल तक चलेगा।
संसदीय सचिवालय में नोटिस जमा होने के बाद से ही स्पीकर ओम बिड़ला ने सदन संचालन की जिम्मेदारी से स्वयं को अलग कर लिया है। उनकी जगह पैनल चेयरपर्सन सदन का संचालन कर रहे हैं। 9 मार्च को होने वाली चर्चा और मतदान भी पैनल चेयरपर्सन की अध्यक्षता में होगा।
संवैधानिक विशेषज्ञों के अनुसार संसदीय नियमों और परंपरा के मुताबिक स्पीकर के खिलाफ लाए गए ‘मोशन फॉर रिमूवल’ पर चर्चा और मतदान की कार्यवाही लोकसभा के उपाध्यक्ष (डिप्टी स्पीकर) को संचालित करनी चाहिए।
इस संदर्भ में लोकसभा के पूर्व महासचिव और संवैधानिक विशेषज्ञ पीडीटी आचार्य ने कहा कि स्पीकर स्वयं इस प्रक्रिया से जुड़े नहीं रह सकते क्योंकि आरोप उन्हीं के खिलाफ हैं। लेकिन डिप्टी स्पीकर का पद वर्तमान में रिक्त है।
उन्होंने कहा कि डिप्टी स्पीकर का पद भारतीय संविधान के अनुच्छेद 93 के तहत अनिवार्य है।
लोकसभा में कांग्रेस के सचेतक मणिकम टैगोर ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि पिछले सात वर्षों से लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद खाली है, जो सामान्य नहीं है। यह असंवैधानिक कदम लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था पर आघात है। उन्होंने दावा किया कि परंपरा के अनुसार डिप्टी स्पीकर का पद विपक्ष को दिया जाना चाहिए ताकि सदन संचालन में संतुलन और निष्पक्षता बनी रहे।