कोझिकोडः कांग्रेस नेता शशि थरूर ने पार्टी लाइन से मतभेद की अटकलों को सिरे से खारिज करते हुए साफ कहा है कि उन्होंने संसद में कभी भी कांग्रेस के आधिकारिक रुख का उल्लंघन नहीं किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर को लेकर उनका जो सार्वजनिक रुख रहा है, उस पर वे आज भी कायम हैं और इसके लिए किसी तरह की माफी की जरूरत नहीं समझते।
थरूर ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद उन्होंने एक लेखक और विश्लेषक के रूप में यह राय रखी थी कि इस हमले को बिना जवाब के नहीं छोड़ा जा सकता और आतंक के खिलाफ सीमित लेकिन ठोस सैन्य कार्रवाई जरूरी है। यही एकमात्र मुद्दा है, जिस पर उन्होंने सिद्धांत के आधार पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी।
उन्होंने बताया कि उस समय उन्होंने एक अखबार में लेख लिखकर कहा था कि भारत को लंबी जंग में नहीं फंसना चाहिए, लेकिन आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाना जरूरी है। बाद में केंद्र सरकार ने भी उसी तरह की कार्रवाई की, जिसे ऑपरेशन सिंदूर नाम दिया गया। थरूर ने कहा कि जब सरकार ने वही किया, जिसकी उन्होंने सिफारिश की थी, तो उसकी आलोचना करने का सवाल ही नहीं उठता।
थरूर के इस बयान को पार्टी के भीतर कथित नाराजगी की खबरों से जोड़कर देखा जा रहा है। हाल ही में कोच्चि में हुए एक पार्टी कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी द्वारा उन्हें मंच पर विशेष रूप से संबोधित न किए जाने के बाद ऐसी अटकलें तेज हुई थीं। इसके अलावा, उनके अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की बैठक में शामिल न होने को लेकर भी चर्चाएं हुईं।
हालांकि, थरूर ने स्पष्ट किया कि वह पहले से तय कार्यक्रम के तहत केरल लिटरेचर फेस्टिवल में शामिल होने के कारण बैठक में नहीं आ सके थे और इसकी जानकारी उन्होंने पार्टी नेतृत्व को पहले ही दे दी थी। कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने भी इन अटकलों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि थरूर पार्टी और नेतृत्व दोनों से संतुष्ट हैं।
गौरतलब है कि शशि थरूर ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत का पक्ष रखने के लिए बनाए गए बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का भी हिस्सा रहे थे। उस समय कुछ कांग्रेस नेताओं ने इस पर सवाल उठाए थे, लेकिन थरूर ने इसे राष्ट्रीय हित से जुड़ा मुद्दा बताया।