नयी दिल्लीः नयी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित एक होटल में लगी भीषण आग अब एक दर्दनाक त्रासदी बन चुकी है, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई। मृतकों में 17 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं और अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। यह हादसा कुछ ही मिनटों में इतना भयावह हो गया कि पूरा भवन धुएं और आग की चपेट में आ गया।
प्रारंभिक जांच में यह आशंका जताई गई है कि आग की शुरुआत ग्राउंड फ्लोर पर सीढ़ियों के पास रखी किसी ज्वलनशील सामग्री से हुई। यही स्थान कुछ ही पलों में आग का केंद्र बन गया और तेजी से पूरे भवन में फैल गया। दमकल विभाग का कहना है कि आग के वास्तविक कारण की पुष्टि फॉरेंसिक जांच के बाद ही होगी।
हादसे की सबसे बड़ी भयावहता इमारत की संरचनात्मक खामियों में सामने आई है। सभी खिड़कियां कथित रूप से सील थीं, जिससे धुआं बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। इसके चलते पूरा होटल कुछ ही मिनटों में गैस चैंबर में बदल गया और अंदर मौजूद लोगों के लिए बचने के रास्ते लगभग खत्म हो गए।
धुएं और अफरातफरी के बीच कई लोग अपनी जान बचाने के लिए ऊंची मंजिलों से कूदने को मजबूर हो गए। इस दौरान कई लोगों को गंभीर चोटें और फ्रैक्चर भी आए, जबकि कई की हालत अभी भी नाजुक बनी हुई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि परिसर में एलपीजी सिलेंडर मौजूद थे, जिसने आग की तीव्रता को और बढ़ा दिया। दमकल अधिकारियों के अनुसार, आग तेजी से ऊपर की ओर फैलती चली गई और इमारत की संरचना ने इसे चिमनी जैसा प्रभाव दे दिया।
एक और गंभीर पहलू यह है कि होटल का संचालन नियमों के विपरीत किया जा रहा था। जहां केवल छह कमरों की अनुमति थी, वहां कथित रूप से 25 कमरों का संचालन किया जा रहा था। यह तथ्य सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी की ओर इशारा करता है।
पूर्व दमकल अधिकारियों के अनुसार, संकरी गलियां, भीड़भाड़ और सीमित जल स्रोतों ने बचाव कार्य को बेहद कठिन बना दिया। इमारत की बनावट ऐसी थी कि धुआं तेजी से ऊपर की मंजिलों में भरता चला गया और लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।
फिलहाल पुलिस ने होटल मालिक की तलाश के लिए कई टीमें गठित कर दी हैं और पूरे मामले की गहन जांच जारी है। यह हादसा एक बार फिर शहरी सुरक्षा व्यवस्था, भवन नियमों और निगरानी तंत्र की गंभीर कमजोरियों को उजागर करता है, जहां छोटी सी लापरवाही भी बड़े पैमाने पर जानलेवा साबित हो सकती है।