नयी दिल्लीः दिसंबर की शुरुआत में इंडिगो की हजारों फ्लाइट्स कैंसिल होने के मामले में बड़ी कार्रवाई सामने आई है। डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि इस पूरे मामले में साफ तौर पर प्लानिंग की कमी पाई गई, जिसके चलते केंद्र सरकार ने इंडिगो के एक सीनियर वाइस प्रेसिडेंट को बर्खास्त करने का आदेश दिया है। यह जानकारी गुरुवार को DGCA के वकील ने अदालत में दी। हालांकि, जिस सीनियर वाइस प्रेसिडेंट को हटाया गया है, उसका नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।
DGCA ने कोर्ट को यह भी बताया कि इंडिगो के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर इसिड्रे पोरक्वेरा ओरेया समेत छह अन्य सीनियर एग्जीक्यूटिव्स को चेतावनी जारी की गई है। इन अधिकारियों में कंपनी के फ्लाइट ऑपरेशन्स के डिप्टी हेड भी शामिल हैं। मामला अब 25 फरवरी को फिर से सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
गौरतलब है कि इसी दिन यह भी सामने आया था कि इंडिगो के तिमाही मुनाफे में करीब 75 फीसदी की गिरावट आई है और कंपनी को लगभग 63 मिलियन अमेरिकी डॉलर का नुकसान हुआ है। बताया गया कि यह नुकसान दिसंबर में बड़ी संख्या में फ्लाइट्स कैंसिल होने की वजह से हुआ।
दरअसल, देश के पायलट लंबे समय से यह मांग कर रहे थे कि उन्हें ज्यादा आराम दिया जाए ताकि थकान के कारण किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके। इस मांग को मानते हुए DGCA ने 2025 में पायलटों और केबिन क्रू की ड्यूटी से जुड़े फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों में बदलाव किए थे, जिन्हें नवंबर की शुरुआत में लागू किया गया। कहा जा रहा है कि इन नियमों के लागू होने के बाद दिसंबर की शुरुआत से ही इंडिगो की फ्लाइट्स एक के बाद एक कैंसिल होने लगीं। अकेले 5 दिसंबर को करीब 1,000 फ्लाइट्स रद्द होने के बाद केंद्र सरकार ने नए FDTL नियमों को सस्पेंड कर दिया और इंडिगो को दो महीने का समय दिया। तब तक हजारों यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
DGCA की ओर से गुरुवार को कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार, 3 से 5 दिसंबर के बीच इंडिगो की कुल 2,507 फ्लाइट्स कैंसिल हुईं और 1,852 फ्लाइट्स देरी से चलीं। इसके चलते देश के अलग-अलग एयरपोर्ट्स पर करीब तीन लाख यात्री फंस गए थे। नवंबर में लाए गए नए नियमों के बाद इतनी बड़ी संख्या में फ्लाइट्स रद्द होने को लेकर सवाल उठे, जिसके बाद केंद्र के निर्देश पर DGCA ने चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। इस मामले में इंडिगो के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई थी, जिस पर कोर्ट ने DGCA से रिपोर्ट तलब की थी।
DGCA की रिपोर्ट में बताया गया है कि अतिरिक्त फ्लाइट्स ऑपरेट करना, सीमित समय में सभी एयरक्राफ्ट, पायलट और केबिन क्रू का उपयोग, रेगुलेटर के निर्देशों को लागू करने में तैयारी की कमी, पर्याप्त सॉफ्टवेयर सपोर्ट का अभाव और मैनेजमेंट की खामियां इस संकट के लिए जिम्मेदार रहीं। कोर्ट को यह भी बताया गया कि इन कमियों के चलते इंडिगो पर 22 करोड़ रुपये से ज्यादा का जुर्माना लगाया गया है और कंपनी के सीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
इसके अलावा, DGCA ने एयरलाइन को सभी कमियों को तुरंत दूर करने का निर्देश दिया है। जब तक ये खामियां पूरी तरह दूर नहीं हो जातीं, तब तक इंडिगो को 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी देने के लिए कहा गया है। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 25 फरवरी को होगी।