नई दिल्ली: भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) को आकर्षित करने के लिए घरेलू निजी निवेश की भूमिका अहम है। यह बात पूर्व आरबीआई गवर्नर और प्रसिद्ध अर्थशास्त्री रघुराम राजन ने कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक भारत में कॉर्पोरेट क्षेत्र की दीर्घकालिक और सतत निवेश गतिविधि नहीं बढ़ेगी, तब तक विदेशी निवेश को वांछित स्तर तक लाना मुश्किल होगा।
राजन ने कहा, "FDI तभी आएगा जब आपका निजी क्षेत्र भी निवेश कर रहा होगा, लेकिन अभी ऐसा नहीं हो रहा। इसके पीछे कुछ मुद्दे हैं, जिनमें नीति अस्थिरता प्रमुख है।" उन्होंने यह भी कहा कि ये समस्याएं सुलझाई जा सकती हैं और सरकार आर्थिक सुधारों के प्रति गंभीर है।
राजन ने उदाहरण देते हुए कहा कि तमिलनाडु जैसे राज्य विदेशी निवेश को आकर्षित करने में सफल रहे हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि यह देखना जरूरी है कि भारत से पूंजी क्यों बाहर जा रही है और कैसे इसे रोककर निवेश को बढ़ाया जा सकता है।
राजन ने अमेरिकी टैरिफ और व्यापार अनिश्चितताओं को FDI के लिए बाधक बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत टैरिफ, विशेषकर श्रम-प्रधान उद्योग जैसे वस्त्र और आभूषणों को लंबे समय तक प्रभावित कर सकते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर ये टैरिफ हट जाएं, तो भारत वैश्विक सप्लाई चेन में बेहतर हिस्सेदारी कर सकेगा।
पूर्व आरबीआई गवर्नर ने कहा कि भारत में पोर्टफोलियो निवेश मजबूत हुआ है, लेकिन वैश्विक निवेशक अपने पोर्टफोलियो में फेरबदल कर रहे हैं। उन्होंने यह भी नोट किया कि अमेरिकी ट्रेजरी में भारत की होल्डिंग्स पांच साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई हैं, क्योंकि कई देश अपने रिजर्व्स का डाइवर्सिफिकेशन कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल उच्च GDP वृद्धि पर्याप्त नहीं है। विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए नीति स्थिरता, घरेलू निवेश की गुणवत्ता, और व्यापारिक स्पष्टता भी आवश्यक हैं। घरेलू निजी निवेश में तेजी लाकर भारत न केवल FDI को आकर्षित कर सकता है, बल्कि अपनी आर्थिक मजबूती और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को भी बढ़ा सकता है।