नई दिल्ली: मणिपुर की कुकी महिला, जो मई 2023 में जातीय हिंसा के दौरान 18 साल की उम्र में सामूहिक बलात्कार की शिकार हुई थी, हाल ही में गुवाहाटी में इलाज के दौरान उसका निधन हो गया। पीड़िता बीते दो साल से मानसिक और शारीरिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ नहीं हो सकी थी और बिस्तर पर ही रही।
महिला के परिवार और कुकी छात्र संगठन (KSO) दिल्ली-एनसीआर ने आरोप लगाया कि सरकार ने न्याय दिलाने में पूरी तरह विफलता दिखाई। अपराधियों को न तो गिरफ्तार किया गया, न ही दोषी ठहराया गया, और न ही कोई अधिकारी जवाबदेह ठहराया गया।
पीड़िता की चचेरी बहन ने कहा, "जब भी वह सफेद बोलेरो देखती थी, उसका शरीर सुन्न हो जाता था। उसे यादों के साए ने लगातार परेशान किया। वह अक्सर खाना नहीं खाती थी। क्या वह भारत की बेटी नहीं थी? यह सिर्फ हमारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर का नुकसान है।"
KSO ने कहा कि महिला की मौत का संघर्ष न्याय की अनदेखी का परिणाम है। संगठन ने मांग की है कि सभी अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी और मुकदमा चलाया जाए। कार्रवाई में विफल अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए और कुकी यौन हिंसा पीड़ितों को न्याय, सुरक्षा, पुनर्वास और पूर्ण समर्थन मिले।
जेएनयू की सहायक प्रोफेसर नेमथियांगाई गुइटे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस घटना की समयबद्ध, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। KSO की ग्रेस गुइटे वाल्टे ने कहा कि मणिपुर सरकार पर अब भरोसा नहीं बचा है और उन्होंने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से न्याय की अपील की।
सामाजिक कार्यकर्ता ग्लैडी वैपहेई हुंजान ने कुकी समुदाय के लिए अलग प्रशासन की आवश्यकता बताई। KSO ने जोर देकर कहा कि कुकी-जों समुदाय के लिए अलग प्रशासन होना जरूरी है ताकि सुरक्षा, न्याय और सम्मान सुनिश्चित किया जा सके।
गौरतलब है कि मई 2023 से इम्फाल घाटी के मैतेई और हिल्स के कुकी-जों समूह के बीच जातीय हिंसा में कम से कम 260 लोग मारे गए और हजारों लोग बेघर हुए। राज्य फरवरी 2023 से राष्ट्रपति शासन में है।