नयी दिल्लीः ‘एपस्टीन फाइल्स’ में देश के प्रधानमंत्री का नाम सामने आने के मामले में अब तृणमूल कांग्रेस भी मुखर हो गई है। शुक्रवार को अमेरिका के न्याय विभाग ने कुख्यात यौन अपराधी जेफ़्री एपस्टीन से जुड़े कई दस्तावेज़ सार्वजनिक किए। इन्हीं दस्तावेज़ों में से एक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम भी दर्ज है। इस मुद्दे पर पहले ही कांग्रेस अपनी प्रतिक्रिया दे चुकी है। अब ‘एपस्टीन फाइल्स’ में मोदी का नाम आने को लेकर पश्चिम बंगाल राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने भी तीखा विरोध जताया है।
रविवार सुबह तृणमूल कांग्रेस के एक्स हैंडल से एक पोस्ट किया गया। पोस्ट में कहा गया कि ‘एपस्टीन फाइल्स’ में देश के प्रधानमंत्री का नाम आना वैश्विक मंच पर देश का अपमान है। पोस्ट में यह भी कहा गया है, “जो प्रधानमंत्री खुद को ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ की मिसाल बताते हैं, उनका नाम ‘एपस्टीन फाइल्स’ में आना देश के लिए शर्मनाक है।”
तृणमूल ने इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया की मांग की है। पोस्ट में कहा गया है कि किसी भी लोकतंत्र में यदि इतने गंभीर आरोप लगते हैं तो पारदर्शिता और ज़िम्मेदारी के साथ उनका जवाब दिया जाना चाहिए। चुप्पी कोई समाधान नहीं है। यदि इन आरोपों में रत्ती भर भी सच्चाई है तो प्रधानमंत्री को उसका उचित जवाब देना चाहिए और स्वयं आगे आकर जांच-पड़ताल (स्क्रूटिनी) का सामना करना चाहिए। निजी या राजनीतिक लाभ के लिए देश के सम्मान और नागरिकों के विश्वास को कभी दांव पर नहीं लगाना चाहिए।
इस विवाद की शुरुआत शुक्रवार से हुई। उस दिन जारी दस्तावेज़ों के अनुसार 9 जुलाई 2017 को अमेरिकी अरबपति और कुख्यात यौन अपराधी जेफ़्री एपस्टीन ने एक ईमेल भेजा था। यह ईमेल ‘ज़ेबर वाई’ नाम के एक व्यक्ति को भेजा गया था। ईमेल में लिखा था, “भारतीय प्रधानमंत्री मोदी ने सलाह मानी है और अमेरिकी राष्ट्रपति के हित में इज़राइल में नाच-गाना किया है। कुछ हफ्ते पहले उनकी मुलाक़ात हुई थी। यह काम कर गया!” उल्लेखनीय है कि जून 2017 में प्रधानमंत्री मोदी इज़राइल के दौरे पर गए थे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली इज़राइल यात्रा थी।
इस मुद्दे पर कल ही कांग्रेस भी मुखर हुई थी। सोशल मीडिया पर उस ईमेल को साझा करते हुए कांग्रेस ने दावा किया कि जून 2017 में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाक़ात के दौरान मोदी का संपर्क जेफ़्री एपस्टीन से भी हो सकता है। इसके ठीक एक हफ्ते बाद 4 से 6 जुलाई के बीच प्रधानमंत्री मोदी इज़राइल दौरे पर थे। कांग्रेस का दावा है कि एपस्टीन के ईमेल में जिन ‘सलाहों’ का ज़िक्र है, उन्हीं के आधार पर प्रधानमंत्री की यात्रा या वहाँ का कार्यक्रम तय किया गया था।
हालाँकि विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में इन सभी आरोपों और अटकलों को कड़े शब्दों में ख़ारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि एक सज़ायाफ़्ता अपराधी के निजी ईमेल में क्या लिखा है, उसे किसी भी तरह का महत्व नहीं दिया जाना चाहिए।