नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘चायवाला’ नैरेटिव को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित नेशनल MGNREGA वर्कर्स कन्वेंशन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए सवाल उठाया कि क्या नरेंद्र मोदी ने कभी सच में चाय बनाई है या ट्रेन के डिब्बों में केतली लेकर चाय बेची है। खड़गे ने आरोप लगाया कि ‘चायवाला’ की छवि सिर्फ वोट जुटाने के लिए रचा गया राजनीतिक ड्रामा है।
खड़गे ने अपने भाषण में कहा कि प्रधानमंत्री बार-बार खुद को ‘चायवाला’ बताते हैं, लेकिन यह पूरी तरह प्रचार का हिस्सा है। उनके मुताबिक, यह कहानी गरीबों के नाम पर सहानुभूति बटोरने की कोशिश है, जबकि जमीनी स्तर पर गरीबों के लिए काम नहीं हुआ। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार को गरीबों को दबाने की आदत है।
BJP का पलटवार: कांग्रेस का अहंकार कभी नहीं उतरता
खड़गे के बयान पर भाजपा ने कड़ा पलटवार किया। पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि राहुल गांधी के इशारे पर कांग्रेस अध्यक्ष प्रधानमंत्री का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस पहले पीएम की मां पर टिप्पणी करती है और अब निजी हमलों पर उतर आई है, क्योंकि प्रधानमंत्री ‘अर्बन नक्सल्स और भारत’ के बीच मजबूती से खड़े हैं।
भाजपा ने दावा किया कि जनता कांग्रेस को 2014 की तरह ही भविष्य में भी सबक सिखाएगी और 2029 में भी उसे करारा जवाब मिलेगा।
‘दो लोगों की सरकार’ का आरोप, मोदी-शाह पर साधा निशाना
MGNREGA सम्मेलन में खड़गे यहीं नहीं रुके। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर सरकार को सिर्फ दो लोगों तक सीमित रखने का आरोप लगाया। खड़गे ने कहा कि यह सरकार सिर्फ चुनाव प्रचार में व्यस्त रहती है और किसी बड़ी उपलब्धि का नाम तक नहीं बता सकती।
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने देश को कई बड़े प्रोजेक्ट दिए, जबकि मौजूदा सरकार सिर्फ उद्घाटन और झंडा दिखाने तक सीमित रह गई है।
रेल परियोजनाओं पर भी हमला
खड़गे ने बुलेट ट्रेन और वंदे भारत ट्रेनों को लेकर भी मोदी सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना था कि UPA सरकार के दौरान जितने रेल ट्रैक बिछाए गए थे, उतना काम मौजूदा सरकार नहीं कर पाई है। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने कभी इस तरह प्रचार नहीं किया, जबकि आज हर छोटे काम का उद्घाटन बड़े प्रचार में बदला जा रहा है।
खड़गे के बयान और भाजपा की प्रतिक्रिया ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि आने वाले चुनावों में नैरेटिव बनाम परफॉर्मेंस का मुद्दा केंद्र में रहने वाला है। जहां कांग्रेस मोदी की छवि को ‘प्रचार आधारित’ बता रही है, वहीं भाजपा इसे जनता से जुड़ाव और संघर्ष की कहानी बताकर बचाव में उतर आई है।