नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 12 जनवरी को पृथ्वी अवलोकन उपग्रह (EOS-N1) के प्रक्षेपण के साथ अपने 2026 के लॉन्च अभियान की शुरुआत करेगा। इस मिशन को पीएसएलवी-C62 रॉकेट के जरिए पूरा किया जाएगा। इस मिशन का संचालन ISRO की वाणिज्यिक शाखा न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NISL) करेगी। इस मिशन में EOS-N1 के साथ 14 अन्य सह-यात्री (को-पैसेंजर) उपग्रह भी अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए हैं।
ISRO ने बताया कि रॉकेट और उपग्रहों का एकीकरण पूरा हो चुका है और प्री-लॉन्च जांच जारी है। पीएसएलवी-C62 का प्रक्षेपण 12 जनवरी को सुबह 10:17 बजे श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के पहले लॉन्च पैड से होगा। मिशन के लिए 25 घंटे की उलटी गिनती 11 जनवरी से शुरू हो जाएगी। यह पीएसएलवी की 64वीं उड़ान होगी। इस मिशन का मुख्य उपग्रह EOS-N1 है, जिसे थाईलैंड और यूनाइटेड किंगडम ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। प्रक्षेपण के बाद पूरा मिशन लगभग दो घंटे तक चलेगा।
15 उपग्रह होंगे लॉन्च
प्राथमिक पेलोड EOS-N1 के साथ 13 अन्य सह-यात्री उपग्रह भी अंतरिक्ष में स्थापित किए जाएंगे। ये उपग्रह प्रक्षेपण के लगभग 17 मिनट बाद निर्धारित सूर्य-समकालिक कक्षा में पहुंच जाएंगे।
PS-4 चरण और केआईडी कैप्सूल का प्रदर्शन
इस मिशन का एक और खास हिस्सा है रॉकेट के चौथे चरण (PS-4) को अलग करना और स्पेन के एक स्टार्टअप द्वारा विकसित केआईडी (KID) कैप्सूल का प्रदर्शन। वैज्ञानिक चौथे चरण को री-स्टार्ट करेंगे ताकि केआईडी कैप्सूल को डी-बूस्ट किया जा सके और इसे पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश (Re-entry) कराया जा सके। इसके बाद केआईडी कैप्सूल को अलग किया जाएगा।PS-4 चरण और केआईडी कैप्सूल दोनों पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश कर दक्षिण प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन करेंगे।
PSLV का सफर और उपलब्धियां
अब तक PSLV की 63 सफल उड़ानें हो चुकी हैं। इनमें चंद्रयान-1, मंगल ऑर्बिटर मिशन (MOM) और आदित्य-L1 जैसे महत्वाकांक्षी मिशन शामिल हैं। इस मिशन के साथ ISRO 2026 के लिए अपना लॉन्च अभियान शुरू करेगा और देश की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी को और मजबूत बनाने का संकेत देगा।