पणजीम (गोवा) : कनाडा के ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधन मंत्री टिम हॉजसन ने कहा है कि भारत और कनाडा के लिए मिलकर काम करने के कई अवसर मौजूद हैं। इंडिया एनर्जी वीक सम्मेलन के इतर एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा, “यह एक बहुत अच्छी बैठक थी, और भारत व कनाडा के लिए साथ काम करने के कई अवसर हैं।”
अपने पहले के भाषण में हॉजसन ने कहा कि कनाडा महत्वपूर्ण खनिजों का एक बड़ा आपूर्तिकर्ता है और भारत के साथ व्यापार के बढ़ते अवसरों पर भी बात की।
उन्होंने विभिन्न देशों पर अमेरिका द्वारा लगाए जा रहे टैरिफ का परोक्ष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि यह संदेश देना जरूरी है कि “हम ऐसे विश्व में रहना चाहते हैं, जहाँ मुक्त व्यापार और भरोसेमंद रिश्तों में विश्वास हो,” न कि ऐसे विश्व में “जहाँ ताकत ही सही मानी जाए और सबसे शक्तिशाली देश सब पर शुल्क थोप दें।”
उन्होंने कहा, “मुझे भारत को यह बताने की जरूरत नहीं है कि जब लोग आपके देश के साथ आर्थिक एकीकरण का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करते हैं तो उसका क्या अर्थ होता है। मुझे यह भी बताने की जरूरत नहीं कि जब प्रभुत्वशाली शक्तियाँ शुल्कों को दबाव के हथियार के रूप में इस्तेमाल करती हैं तो उसका क्या मतलब होता है। हम एक बदलती दुनिया में जी रहे हैं, और ऊर्जा उसके केंद्र में है।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं यहाँ इसलिए हूँ क्योंकि आप की तरह ही इस बदलाव का मुकाबला करने का तरीका बहुपक्षीय रिश्ते बनाना और आपूर्ति के विविधीकरण पर और अधिक जोर देना है। आपने अभी यूरोपीय संघ के साथ सबसे बड़े समझौतों में से एक पर हस्ताक्षर किए हैं, जो यह कहने का एक बेहतरीन उदाहरण है कि नहीं, हम ऐसे विश्व में नहीं रहेंगे जहाँ ताकत ही सही हो। हम ऐसे विश्व में नहीं रहेंगे जहाँ सबसे मजबूत देश सब पर शुल्क लगा दें। हम ऐसे विश्व में रहेंगे जहाँ मुक्त व्यापार और भरोसेमंद रिश्तों में विश्वास हो।”
उन्होंने कहा कि कनाडा पहले अपनी 98 प्रतिशत ऊर्जा एक ही ग्राहक को देता था और अब आपूर्ति में विविधता लाने की आवश्यकता है। कनाडा उन महत्वपूर्ण खनिजों का एक बेहतरीन आपूर्तिकर्ता है। हम इस पर चर्चा करेंगे और हमारी कई कंपनियाँ इस सम्मेलन में मौजूद हैं, जो न केवल आपके अपने महत्वपूर्ण खनिजों के विकास में मदद करेंगी, बल्कि जहाँ हमारे पास साझा करने के लिए संसाधन होंगे, वहाँ आपकी ऊर्जा संक्रमण प्रक्रिया में भी सहयोग देंगी। हमें अपनी आपूर्ति में विविधता लाने की जरूरत है। कनाडा पहले अपनी 98 प्रतिशत ऊर्जा एक ही ग्राहक को देता था। हम अपनी आपूर्ति में विविधता लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमें भारत के साथ काम करने का बड़ा अवसर दिखता है क्योंकि दुनिया में ऊर्जा की सबसे तेज़ी से बढ़ती मांग भारत में होगी-चाहे वह एलएनजी हो, एलपीजी हो, यूरेनियम हो या तेल।”