मुंबईः महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के विमान हादसे में अब चौंकाने वाली जानकारियाँ सामने आई हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार यदि फ्लाइट में एक विशेष सैटेलाइट आधारित सुरक्षा प्रणाली मौजूद होती तो खराब मौसम के बावजूद विमान सुरक्षित लैंडिंग कर सकता था। लेकिन यह प्रणाली अनिवार्य होने से मात्र 28 दिन पहले ही उस चार्टर्ड फ्लाइट का पंजीकरण हो गया था। इसी वजह से अजित पवार की फ्लाइट में अत्याधुनिक सैटेलाइट तकनीक मौजूद नहीं थी। परिणामस्वरूप आपातकालीन लैंडिंग के दौरान बारामती में यह भयावह दुर्घटना घटित हुई।
‘गगन’ तकनीक और कानूनी पेच
भारत में विमानन सुरक्षा के लिए ‘गगन’ नामक एक सैटेलाइट प्रणाली लागू है। यह तकनीक घने कोहरे या आपदा की स्थिति में पायलट को रनवे सही तरीके से देखने में मदद करती है। केंद्र सरकार ने 1 जुलाई 2021 से नए विमानों में इस तकनीक को अनिवार्य कर दिया था। लेकिन अजित पवार का लियरजेट विमान उसी वर्ष 2 जून को पंजीकृत हुआ था। यानी नियम लागू होने से ठीक 28 दिन पहले। इसी कारण उस विमान में यह आधुनिक उपकरण नहीं लगाया गया था।
बारामती में वास्तव में क्या हुआ?
बारामती एयरपोर्ट काफी छोटा है और वहाँ बड़े हवाई अड्डों जैसी उन्नत लैंडिंग प्रणाली उपलब्ध नहीं है। बुधवार सुबह कोहरे के कारण दृश्यता बेहद कम थी। पायलट पहली बार में लैंडिंग करने में असफल रहे और दोबारा प्रयास किया।
जांच अधिकारियों के मुताबिक सुबह 8 बजकर 43 मिनट पर पायलट ने कंट्रोल रूम को बताया कि उन्हें रनवे दिखाई दे रहा है। लेकिन उसके कुछ ही सेकंड बाद विमान रनवे के पास जा गिरा और तुरंत आग लग गई।
क्या तकनीक की कमी ही हादसे की वजह बनी?
विशेषज्ञों का मानना है कि 16 साल पुराने इस विमान में अत्याधुनिक लैंडिंग प्रणाली मौजूद नहीं थी। खराब मौसम में पायलट को अपनी आँखों से रनवे देखकर ही विमान उतारना पड़ता था। यदि ‘गगन’ तकनीक उपलब्ध होती, तो सैटेलाइट के जरिए पायलट को सटीक संकेत मिलते। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि अंतिम क्षणों में रनवे को लेकर हुई चूक ही इस जानलेवा हादसे का कारण बनी।