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इंडियन फार्माकोपिया में 121 नई दवाएं शामिल, देश में निगरानी व्यवस्था में बड़ा सुधार

पहली बार रक्त घटकों (ब्लड कंपोनेंट्स) से जुड़े मानकों को भी किया गया शामिल

By अनिर्बान घोष, Posted by: प्रियंका कानू

Jan 05, 2026 13:31 IST

नई दिल्ली: देश में दवा निर्माण और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली को और मजबूत करने की दिशा में इंडियन फार्माकोपिया कमीशन (आईपीसी) ने एक बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में जारी इंडियन फार्माकोपिया 2026 (आईपी-2026) के नवीनतम संस्करण में 121 नए दवाओं के मानक (मोनोग्राफ) जोड़े गए हैं। इनमें पहली बार रक्त घटकों (ब्लड कंपोनेंट्स) से जुड़े मानकों को भी शामिल किया गया है।

शुक्रवार को नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में केंद्रीय स्वास्थ्य तथा रसायन और उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने औपचारिक रूप से आईपी-2026 का विमोचन करते हुए यह जानकारी दी। आईपी-2026 भारत के सरकारी दवा मानकों का दसवां संस्करण है। इस अवसर पर मंत्री ने बताया कि दवाओं की निगरानी (फार्माकोविजिलेंस) के क्षेत्र में भारत ने बीते एक दशक में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने कहा कि जहां वर्ष 2014 में भारत इस क्षेत्र में दुनिया में 123वें स्थान पर था, वहीं 2025 में यह आठवें स्थान पर पहुंच गया है।

मंत्री ने बताया कि नए संस्करण में शामिल 121 मोनोग्राफ किसी विशेष दवा या दवा-घटक की पहचान, गुणवत्ता, शुद्धता, शक्ति, भंडारण और परीक्षण से जुड़े वैज्ञानिक मानकों को परिभाषित करते हैं। दवाओं के निर्माण, विपणन और नियामक निगरानी में ये मोनोग्राफ अनिवार्य संदर्भ के रूप में उपयोग किए जाते हैं। इन नए समावेशों के साथ इंडियन फार्माकोपिया में कुल मोनोग्राफ की संख्या बढ़कर 3,340 हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, नए जोड़े गए मानकों में टीबी-रोधी, मधुमेह-रोधी, कैंसर-रोधी दवाएं और आयरन सप्लीमेंट्स का बड़ा हिस्सा है। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम, गैर-संक्रामक रोग नियंत्रण तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों में प्रयुक्त दवाओं की गुणवत्ता को एक समान बनाना इस अपडेट का प्रमुख उद्देश्य है। इससे रोगी सुरक्षा और दवाओं की प्रभावशीलता और अधिक सुनिश्चित होगी।

कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्यसलिला श्रीवास्तव ने कहा कि विज्ञान आधारित और मजबूत फार्माकोपिया के बिना सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाली दवाएं संभव नहीं हैं। उनके अनुसार, आईपी-2026 देश की दवा नियामक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाएगा। मंत्री नड्डा ने फार्माकोविजिलेंस प्रोग्राम ऑफ इंडिया (PvPI) के तहत दवाओं के दुष्प्रभावों की रिपोर्टिंग में हुए सुधार का भी उल्लेख किया। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की बढ़ती भागीदारी तथा डिजिटल रिपोर्टिंग प्रणाली के विस्तार से यह प्रगति संभव हुई है।

स्वास्थ्य कूटनीति के क्षेत्र में भी इंडियन फार्माकोपिया का महत्व बढ़ रहा है। वर्तमान में इसे दुनिया के 19 देशों में मान्यता प्राप्त है। नए संस्करण में पहली बार 20 रक्त घटकों से संबंधित मोनोग्राफ शामिल किए गए हैं, जिन्हें ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स (सेकंड अमेंडमेंट) रूल्स, 2020 के अनुसार तैयार किया गया है। इन मानकों में रक्त के विभिन्न घटकों, जैसे प्लाज़्मा, रेड सेल्स, प्लेटलेट्स, हीमोग्लोबिन और अन्य कोशिकीय तत्वों की पहचान, प्रसंस्करण और परीक्षण की विधियों को स्पष्ट किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे रक्त और रक्त-आधारित उत्पादों की गुणवत्ता जांच और अधिक मज़बूत होगी तथा ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की सुरक्षा और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना आसान होगा।

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