त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, ऊनी (वूल) कपड़ों से त्वचा पर रैशेज़ हो सकते हैं लेकिन हमेशा नहीं। ऊन के रेशे जब त्वचा से रगड़ते हैं तो कई बार असुविधा पैदा होती है। यह समस्या खासकर उन लोगों में अधिक होती है जिनकी त्वचा बहुत संवेदनशील है या जिन्हें एक्जिमा है। डर्मेटोलॉजिस्ट सुनील कुमार प्रभु कहते हैं कि कुछ लोगों को ऊन से एलर्जी भी हो सकती है। ऊन में इस्तेमाल किए गए रसायन या कपड़े बनाने के दौरान प्रयुक्त रंग भी त्वचा की समस्या पैदा कर सकते हैं। स्वेटर या गर्म कपड़े शरीर को ठंड से बचाते हैं और शरीर का तापमान बढ़ाते हैं। जिन हिस्सों में हवा नहीं पहुंच पाती, वहां पसीना जमा हो जाता है। चिकित्सकों के अनुसार, ऐसी स्थिति में बैक्टीरिया और फंगस बढ़ सकते हैं, जिसके कारण त्वचा में खुजली और लालिमा के साथ रैशेज भी हो सकते हैं।
त्वचा की असुविधा और एलर्जी एक जैसी नहीं होती। तंग कपड़े पहनते ही कई लोगों को असुविधा होती है, लेकिन यह आम तौर पर अस्थायी होती है और कुछ ही समय में ठीक हो जाती है। लेकिन एलर्जी या “कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस” अलग मामला है। इसमें त्वचा में खुजली, लालिमा और सूजन हो सकती है और यह आसानी से ठीक नहीं होती। कुछ मामलों में दवा की आवश्यकता भी पड़ती है।
जिनकी त्वचा संवेदनशील या बहुत शुष्क है, उन्हें सीधे शरीर पर स्वेटर नहीं पहनना चाहिए। चिकित्सकों के अनुसार, पहले सूती पतली कपड़े पहनें और उसके ऊपर गर्म कपड़े पहनें। स्वेटर खरीदते समय भी सावधानी बरतें, त्वचा के लिए सुरक्षित, नरम और प्राकृतिक या हर्बल सामग्री वाले स्वेटर का उपयोग करना बेहतर होता है।