नई दिल्लीः वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) उद्योग में मांग को लेकर अनिश्चितता बनी रही। डिस्क्रिशनरी खर्च पर दबाव के कारण कंपनियों को विकास बनाए रखने के लिए लागत में कटौती और दक्षता बढ़ाने की रणनीतियों पर निर्भर रहना पड़ा। इसका असर कंपनियों की वित्तीय रिपोर्टों में दिखाई दे सकता है।
ब्लूमबर्ग के अनुमान के अनुसार देश की शीर्ष छह आईटी कंपनियों की तिमाही आय वृद्धि दर 1 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के बीच रह सकती है हालांकि साल दर साल आधार पर कुछ सुधार देखने को मिल सकता है। अक्टूबर दिसंबर तिमाही में आमतौर पर आय कमजोर रहती है क्योंकि इस अवधि में अमेरिका और यूरोप में छुट्टियां अधिक होती हैं।
भले ही नतीजों में कमजोरी दिखे लेकिन निवेशकों और विशेषज्ञों की नजर इस बात पर रहेगी कि आईटी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े कौन से निवेश और पहल कर रही हैं। इस पर भी ध्यान रहेगा कि क्या AI आधारित मांग वास्तव में स्थायी आय का रूप ले पा रही है या नहीं। निवेशक AI रणनीतियों को लेकर कंपनियों की योजनाएं जानना चाहेंगे। पहले ही टीसीएस ने दो अधिग्रहणों की घोषणा की है और डेटा सेंटर कारोबार में प्रवेश किया है। विप्रो ने हरमन का DTS कारोबार अधिग्रहित किया है। कोफोर्ज ने एनकोरा को खरीदा है। कई अन्य कंपनियां भी अधिग्रहण की राह पर हैं।
मोतीलाल ओसवाल की एक रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है OpenAI और Claude जैसी प्रमुख लार्ज लैंग्वेज मॉडल कंपनियों ने सिस्टम इंटीग्रेटर्स के साथ रचनात्मक साझेदारियां शुरू की हैं। इससे AI सेवाओं का क्षेत्र धीरे धीरे संस्थागत रूप ले रहा है। अगले छह महीनों में इस क्षेत्र की रफ्तार बढ़ेगी और 2026 कैलेंडर वर्ष में AI सेवाओं की मांग स्पष्ट रूप से बढ़ सकती है।
इसके अलावा क्लाइंट बजट के रुझान H1 B वीजा पर निर्भरता और उसके प्रभाव साथ ही डिस्क्रिशनरी खर्च से जुड़े अपडेट पर भी नजर रहेगी। UnearthInsights का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारत के प्रौद्योगिकी उद्योग की वृद्धि 3 से 5 प्रतिशत के बीच रह सकती है। इससे उद्योग का आकार 290 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा लेकिन Nasscom के 300 अरब डॉलर के लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाएगा।
UnearthInsights के फाउंडर और सीईओ गौरव बसु ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका, ऊंची ब्याज दरें और कमजोर रोजगार बाजार के कारण कई कंपनियां आईटी क्षेत्र में डिस्क्रिशनरी खर्च टाल रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यदि वीजा नीतियां सख्त हुईं तो FY27 में आईटी सेवा उद्योग की वृद्धि 1 प्रतिशत से घटकर माइनस 1 प्रतिशत तक जा सकती है।
मुनाफे के लिहाज से रुपये का अवमूल्यन आईटी कंपनियों को कुछ राहत दे सकता है। 2025 में डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 4.7 प्रतिशत कमजोर हुआ है और हाल ही में 91 के स्तर से नीचे चला गया। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि वेतन वृद्धि और विलय एवं अधिग्रहण से जुड़ी लागत के कारण इस लाभ का बड़ा हिस्सा खत्म हो सकता है।
इधर जेनरेटिव AI बुकिंग को लेकर भी बाजार में रुचि बनी हुई है। अब तक केवल टीसीएस और एचसीएल टेक ने अपनी AI आय का खुलासा किया है। टीसीएस ने बताया है कि उसकी AI आय 15 अरब डॉलर है। आईटी कंपनियों के नतीजों का सीजन 12 जनवरी को टीसीएस की रिपोर्ट से शुरू होगा। इसके बाद 14 जनवरी को इंफोसिस और 16 जनवरी को विप्रो अपनी वित्तीय रिपोर्ट जारी करेंगी।