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सेंसेक्स और निफ्टी लगातार दूसरे दिन लाल निशान में, अमेरिकी टैरिफ के खतरे से शेयर बाजार में कमजोरी

वैश्विक संकेत: एशियाई बाजार मजबूत, यूरोप मिश्रित, अमेरिका उच्च स्तर पर बंद।

By श्वेता सिंह

Jan 06, 2026 18:13 IST

मुंबईः भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही दबाव में रहे, जिसका मुख्य कारण भारी पूंजी वाले शेयरों में बिकवाली, भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और अमेरिका की ओर से संभावित आयात शुल्क बढ़ोतरी की आशंका रही। बाजार की चाल से साफ है कि निवेशक फिलहाल जोखिम लेने से बच रहे हैं।

सेंसेक्स 376 अंक गिरकर 85,063 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 26,178 पर आ गया। दिन के कारोबार में रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक जैसे दिग्गज शेयरों में तेज बिकवाली देखी गई। खासतौर पर ट्रेंट के कमजोर तिमाही कारोबार अपडेट के बाद उसमें भारी गिरावट आई, जिसने बाजार की धारणा को और कमजोर किया। विशेषज्ञों के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज में आई तेज गिरावट पिछले कई महीनों की सबसे बड़ी एकदिवसीय कमजोरी में शामिल रही।

सेक्टर स्तर पर देखें तो ऊर्जा, तेल-गैस और सेवा क्षेत्र सबसे ज्यादा दबाव में रहे, जबकि स्वास्थ्य सेवा, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे कुछ सेक्टरों ने बाजार को आंशिक सहारा दिया। यह संकेत देता है कि बाजार में व्यापक बिकवाली के बजाय चुनिंदा शेयरों और सेक्टरों में दबाव ज्यादा रहा।

निवेशकों के रुझान पर नजर डालें तो विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बिकवाली जारी रखी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने जोरदार खरीदारी की। इससे यह संकेत मिलता है कि घरेलू निवेशक बाजार को दीर्घकालिक नजरिए से समर्थन देने की कोशिश कर रहे हैं।

इस बीच सेवा क्षेत्र से जुड़े ताजा आंकड़े भी बाजार के लिए उत्साहजनक नहीं रहे। दिसंबर में सेवा क्षेत्र की वृद्धि 11 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गई, जिससे आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि कंपनियों का दीर्घकालिक भरोसा बना हुआ है, लेकिन मौजूदा माहौल में सतर्कता साफ नजर आती है।

वैश्विक स्तर पर एशियाई बाजारों में मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में सीमित बढ़त के बावजूद भारतीय बाजार दबाव में रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला-अमेरिका तनाव, रूस से तेल आयात को लेकर अमेरिकी रुख और आगामी तिमाही नतीजों को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों को फिलहाल रक्षात्मक रणनीति अपनाने पर मजबूर किया है।

कुल मिलाकर, बाजार की मौजूदा गिरावट लाभ बुकिंग और वैश्विक जोखिमों का नतीजा है। आगे की दिशा वैश्विक संकेतों, अमेरिकी व्यापार नीतियों और कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजों पर निर्भर करेगी।

(समाचार एई समय कहीं भी निवेश की सलाह नहीं देता। शेयर बाज़ार या किसी भी तरह का निवेश जोखिम के अधीन होता है। निवेश से पहले सही तरह से अध्ययन करना और विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। यह खबर केवल शिक्षा और जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित की गई है।)

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