भारत में शेयर बाजार को सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए SEBI, NSE और BSE जैसी संस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन इन्हीं के समानांतर एक ऐसा फर्जी तंत्र भी सक्रिय है जो कानून की पहुंच से बाहर रहकर अरबों–खरबों का खेल खेल रहा है। इसे ही डब्बा ट्रेडिंग कहा जाता है। यह अवैध कारोबार अब छोटे सट्टेबाजों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि एक संगठित, तकनीक-आधारित और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का रूप ले चुका है।
क्या है डब्बा ट्रेडिंग?
डब्बा ट्रेडिंग, जिसे बॉक्स ट्रेडिंग या बकेट ट्रेडिंग भी कहा जाता है, असल में शेयर बाजार के नाम पर सट्टेबाजी है। इसमें निवेशकों को यह दिखाया जाता है कि वे NSE या BSE पर ट्रेड कर रहे हैं, जबकि वास्तविकता में कोई भी सौदा मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज तक पहुंचता ही नहीं। निवेशक शेयर या इंडेक्स के भाव बढ़ने–घटने पर दांव लगाते हैं और पूरा लेन-देन ऑपरेटर के निजी सिस्टम, ऐप या वेबसाइट पर दर्ज होता है। मुनाफा और नुकसान सिर्फ स्क्रीन पर दिखता है, असल शेयर कभी खरीदे या बेचे ही नहीं जाते।
कानून की नजर में गंभीर अपराध
डब्बा ट्रेडिंग सीधे तौर पर Securities Contracts (Regulation) Act, 1956, SEBI Act, 1992 और भारतीय न्याय संहिता, 2023 का उल्लंघन है। इसके बावजूद यह कारोबार खुलेआम फल-फूल रहा है और सरकार को हर साल हजारों करोड़ रुपये के टैक्स राजस्व का नुकसान हो रहा है।
मुंबई से पूरे देश तक फैला नेटवर्क
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई डब्बा ट्रेडिंग का बड़ा केंद्र बनकर उभरी है। 2021 में घाटकोपर के पार्कसाइट इलाके में क्राइम ब्रांच द्वारा पकड़ा गया रैकेट इसका बड़ा उदाहरण है, जहां NSE और BSE के इंडेक्स पर अवैध सट्टा लगाया जा रहा था। जांच में कुछ ही महीनों में हजारों करोड़ रुपये के टर्नओवर के सबूत मिले। इसके बाद कांदिवली और आसपास के इलाकों में “Moodi” जैसे अनधिकृत ऐप्स के जरिए चल रहे नेटवर्क सामने आए। इनमें एक ही मामले में 4,600 करोड़ रुपये से ज्यादा के लेन-देन और करीब 2 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी का आरोप लगा।
अब बैकरूम नहीं, हाई-टेक सिस्टम
डब्बा ट्रेडिंग अब पुराने जमाने की बैकरूम सट्टेबाजी नहीं रही। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच से साफ हुआ है कि यह एक हाई-टेक सिंडिकेट बन चुका है। नकली ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म, प्रोफेशनल MT5 सर्वर, रियल टाइम चार्ट, एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन और हवाला नेटवर्क—सब कुछ इस सिस्टम का हिस्सा है। ऐसे सर्वर उपलब्ध हैं जिनसे ट्रेड के नतीजे मनचाहे तरीके से बदले जा सकते थे। LotusBook247, V Money, 8 Stock Heights, iBull Capital और World777 जैसे प्लेटफॉर्म भी जांच के दायरे में आए, जिनका किसी मान्यता प्राप्त एक्सचेंज से कोई संबंध नहीं था।
लालच का मनोविज्ञान: निवेशक कैसे फंसते हैं
डब्बा ट्रेडिंग की सबसे बड़ी ताकत निवेशकों का लालच है। “गारंटीड रिटर्न” का वादा, शुरुआती दिनों में जानबूझकर छोटा मुनाफा, व्हाट्सऐप और टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए प्रचार और असली ट्रेडिंग जैसा इंटरफेस-इन सबके जरिए भरोसा बनाया जाता है। जैसे ही निवेशक बड़ी रकम लगाता है या तो उसका अकाउंट ब्लॉक कर दिया जाता है या पूरा प्लेटफॉर्म ही बंद हो जाता है। गैरकानूनी होने की वजह से शिकायत का रास्ता भी बंद हो जाता है।
काले धन का सफर: जमीन से क्रिप्टो तक
डब्बा ट्रेडिंग से कमाया गया पैसा सीधे बैंकिंग सिस्टम में नहीं आता। ED की जांच में सामने आया है कि इस रकम को जमीन, रियल एस्टेट, सोना, ज्वेलरी, लग्जरी घड़ियां और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया जाता है या हवाला के जरिए दुबई और अन्य देशों में भेज दिया जाता है। इससे मनी लॉन्ड्रिंग और संगठित अपराध को भी बढ़ावा मिलता है।
विज्ञापनों से फैलता जाल, सेबी की सख्ती
SEBI ने हाल के महीनों में डब्बा ट्रेडिंग को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों पर सख्त रुख अपनाया है। एक प्रमुख हिंदी अखबार को नोटिस जारी किया गया, साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और NSE ने निवेशकों को चेतावनी दी। ED ने भी ऐसे “सरोगेट विज्ञापनों” पर चिंता जताई है, जिनमें खेल या ब्रांड के नाम पर QR कोड देकर लोगों को सट्टेबाजी साइटों तक पहुंचाया जाता है।
सबसे बड़ा सवाल: कार्रवाई क्यों धीमी
नाम, नेटवर्क और प्लेटफॉर्म की पहचान के बावजूद डब्बा ट्रेडिंग पर पूरी तरह लगाम क्यों नहीं लग पा रही-यह सबसे बड़ा सवाल है। विशेषज्ञों के मुताबिक तकनीक की तेजी, नकद लेन-देन, अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क और सीमित संसाधनों ने इस अवैध कारोबार को बेहद जटिल बना दिया है।
निवेशकों के लिए साफ चेतावनी
डब्बा ट्रेडिंग सिर्फ अवैध सट्टा नहीं, बल्कि एक समानांतर फर्जी अर्थव्यवस्था है जो भारत के असली शेयर बाजार की साख को चुनौती दे रही है। निवेशकों के लिए सबक बिल्कुल साफ है-सिर्फ SEBI-पंजीकृत ब्रोकर के जरिए और मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर ही निवेश करें। जब तक इस काले कारोबार पर सख्त और तेज कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह फर्जी बाजार आम लोगों की गाढ़ी कमाई और देश की वित्तीय व्यवस्था दोनों के लिए खतरा बना रहेगा।