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फिर वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता, क्या और महंगे होंगे सोना-चांदी?

विशेषज्ञों के एक वर्ग का दावा है कि सोना और चांदी की कीमतों में फिर से तेजी आ सकती है।

By देवार्घ्य भट्टाचार्य, Posted by: रजनीश प्रसाद

Jan 05, 2026 16:06 IST

नयी दिल्लीः हाल ही में समाप्त हुए 2025 में भू-राजनीतिक मानचित्र पर लगातार बनी “अस्थिरता” के सहारे सोना और चांदी दोनों धातुओं ने लंबी छलांग लगाई। रिटर्न के मामले में चांदी की चमक के आगे सोने की तेजी फीकी पड़ गई। साल की शुरुआत में कुछ निवेशक सोना और चांदी की कीमतों में “कंसोलिडेशन” का दौर देख रहे हैं लेकिन शुक्रवार रात अमेरिका द्वारा वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उनकी पत्नी सहित अमेरिका ले जाने की घटना के बाद एक बार फिर वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता पैदा हो सकती है। विशेषज्ञों के एक वर्ग का मानना है कि इसका असर सोना-चांदी की कीमतों में नई तेजी के रूप में दिख सकता है।

समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण अमेरिका में मौजूद सोने के भंडार में सबसे बड़ा हिस्सा वेनेजुएला के पास है जिसकी कीमत करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये आंकी जा रही है। ऐसे में वैश्विक बाजार में सोने की कीमतों पर इसके प्रभाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा। आंकड़ों के मुताबिक 2025 में सोने की कीमतों में करीब 65 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई जबकि पिछले साल चांदी में निवेशकों को लगभग 145 प्रतिशत का रिटर्न मिला।

विशेषज्ञों के अनुसार इस सप्ताह सोना-चांदी के बाजार के लिए कुछ प्रमुख कारक अहम हो सकते हैं, जो इस प्रकार हैं-

वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई

पिछले शुक्रवार रात ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला में सैन्य अभियान चलाया। इसके बाद वहां के राष्ट्रपति को अमेरिकी सेना ने हिरासत में लिया जिसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर स्वीकार किया। वहीं रविवार को बीजिंग ने दक्षिण अमेरिका में वॉशिंगटन की इस सैन्य कार्रवाई का कड़ा विरोध किया। चीन की सरकार ने कहा कि ट्रंप प्रशासन के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हुआ है। बाजार विशेषज्ञों के एक वर्ग का मानना है कि इससे सोना और चांदी की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी हो सकती है।

सोना-चांदी अनुपात

पिछले सप्ताह सोना और चांदी के बीच कीमतों का अनुपात लगभग 1:60 था जिसे कुछ विशेषज्ञ चांदी के लिए ओवरवैल्यूएशन जोन मानते हैं। उनके अनुसार यदि यह अनुपात 1:80 के करीब होता है तो चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना अधिक रहती है। हालांकि मौजूदा हालात में सोना एक निवेश साधन के रूप में फिर से तेजी पकड़ सकता है। इसलिए हालिया भू-राजनीतिक अस्थिरता में सोने की कीमत चांदी की तुलना में ज्यादा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

सोने की खरीद

आंकड़े बताते हैं कि कोरोना के बाद के दौर में कई देशों के केंद्रीय बैंकों ने बड़ी मात्रा में सोना अपने भंडार में जोड़ा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यदि वैश्विक बाजार का रुझान नकारात्मक होता है तो संबंधित देश अपनी मुद्रा के अवमूल्यन को रोकने और घरेलू वित्तीय जोखिम कम करने के लिए फिर से सोने की खरीद बढ़ा सकते हैं। इससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले इस पीले धातु की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं।

रुपये का मूल्य

पिछले साल डॉलर, यूरो सहित कई मुद्राओं के मुकाबले रुपये में कई बार गिरावट दर्ज की गई। इसके चलते 2025 में डॉलर के मुकाबले रुपये का विनिमय स्तर 90 के ऊपर पहुंच गया और ऐतिहासिक ऊंचाई पर भी गया। विशेषज्ञों के मुताबिक यदि रुपये में गिरावट का रुझान जारी रहता है तो घरेलू बाजार में सोना और महंगा हो सकता है।

विशेषज्ञों के बहुमत का मानना है कि पिछले कुछ दशकों में जब जब भू-राजनीतिक या आर्थिक अस्थिरता पैदा हुई है, तब-तब सोने की कीमतों में तेजी आई है। ऐसा इसलिए क्योंकि बाजार की अस्थिरता से बचने के लिए निवेशकों का एक बड़ा वर्ग सोने को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में चुनता है। इसी वजह से कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि साल की शुरुआत में ही सोने की कीमतें 2025 के शिखर को पार कर नई ऊंचाइयों पर पहुंच सकती हैं।

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