🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार, अमेरिकी हमले में डूबा ‘इंडियन नेवी का मेहमान’, तेहरान नाराज

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी अमेरिकी सबमरीन ने युद्ध के दौरान टॉरपीडो का उपयोग करके दुश्मन जहाज को डुबोया है।

तेहरान : ईरान के युद्धपोत IRIS Dena पर अमेरिका की सबमरीन के हमले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है तेहरान ने। इस संदर्भ में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने बताया कि यह युद्धपोत हाल ही में भारतीय नौसेना के अतिथि के रूप में यात्रा पर गया था और उसमें लगभग 130 नाविक थे। ईरान का दावा है कि बिना किसी पूर्व चेतावनी के अमेरिका ने उनके युद्धपोत पर हमला किया है जो स्थिति को खतरनाक दिशा में धकेल रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में अराघची ने लिखा है कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने समुद्र के बीच एक भयानक क्रूरता की है। ईरान के तट से लगभग 2 हजार मील दूर इंडियन नेवी के अतिथि फ्रिगेट डेना पर बिना किसी चेतावनी के हमला किया गया है। मेरी बात याद रखें अमेरिका को अपने इस काम के लिए कड़वे तरीके से पछताना होगा।

अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार हिंद महासागर में श्रीलंका के पास के इलाके में यह घटना हुई। बाद में पेंटागन ने इस पर एक वीडियो भी जारी किया है। उसमें देखा गया है कि किस तरह टॉरपीडो हमले के कारण युद्धपोत का ढांचा टूट रहा है। श्रीलंका के अधिकारियों ने बताया कि जहाज से कम से कम 32 ईरानी नाविकों को बचाया गया है।

अमेरिकी सैन्य बलों की जानकारी के अनुसार सबमरीन ने मार्क-48 हेवीवेट टॉरपीडो का इस्तेमाल किया। 1970 के दशक से यह अमेरिकी नौसेना की सबमरीन से दागा जाने वाला एक एंटी-शिप हथियार है। इसे जहाज के नीचे विस्फोट के लिए बनाया गया है। विस्फोट के कारण विशाल गैस बुलबुला बनता है और उसके कारण जहाज का ढांचा टूटकर तेजी से डूब सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार किसी अमेरिकी सबमरीन ने युद्ध के समय सीधे टॉरपीडो का इस्तेमाल कर दुश्मन जहाज को डुबोया है। आखिरी बार ऐसा 14 अगस्त 1945 को हुआ था। उस समय अमेरिकी सबमरीन यूएसएस टॉर्स्क ने जापान के एक युद्धपोत को डुबो दिया था।

इसके बाद के दशकों में अमेरिकी सबमरीन में टॉरपीडो मौजूद रहने के बावजूद उनका इस्तेमाल मुख्यतः खुफिया अभियानों और क्रूज मिसाइल हमलों के लिए किया गया है। खाड़ी युद्ध से लेकर अफगानिस्तान, इराक, लीबिया और यमन के विभिन्न अभियानों में सबमरीन का इस्तेमाल हुआ लेकिन टॉरपीडो से सीधे जहाज डुबाने की घटना फिर नहीं देखी गई। इसलिए IRIS Dena के डूबने की घटना को समुद्री युद्ध में कई दशकों बाद हुई एक दुर्लभ घटना के रूप में देखा जा रहा है।

Prev Article
पश्चिम एशिया में अभियान को लेकर व्हाइट हाउस के दावे को स्पेन ने खारिज किया
Next Article
5 दिन में हजार पार! ईरान में मौतों की कतार, तेहरान का भी पलटवार

Articles you may like: