ओटावा : अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के चल रहे संघर्ष को लेकर कनाडा की स्थिति एक बार फिर चर्चा में आ गई है। इसकी वजह कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की हालिया टिप्पणी है। उन्होंने कहा है कि इस युद्ध में कनाडा की भागीदारी की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता। उनकी इस टिप्पणी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अटकलें पैदा हो गई हैं।
इससे पहले कार्नी ने कहा था कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल का हमला अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप प्रतीत नहीं होता। उस टिप्पणी के बाद अब उन्होंने कहा है कि मौजूदा परिस्थिति में कनाडा किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं कर रहा है।
कार्नी ने यह भी बताया कि मध्य पूर्व की स्थिति को लेकर कनाडा की स्थिति स्पष्ट है। उनके अनुसार इस पूरे क्षेत्र में अस्थिरता और आतंक का एक प्रमुख स्रोत ईरान है। साथ ही उन्होंने उस देश की मानवाधिकार स्थिति की भी आलोचना की।
कार्नी का कहना है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने या बनाने का अवसर नहीं दिया जा सकता। उन्होंने बताया कि कनाडा और उसके अंतरराष्ट्रीय साझेदार बार-बार ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को बंद करने का आग्रह कर चुके हैं। इस संदर्भ में उन्होंने उल्लेख किया कि पिछले सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से ईरान पर फिर से प्रतिबंध लगाए गए थे। साथ ही कनाडा में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई थी।
कार्नी की हालिया टिप्पणी को लेकर आलोचना भी शुरू हो गई है। आलोचकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून का सवाल उठाने के बावजूद उन्होंने स्पष्ट रूप से यह नहीं कहा कि कनाडा इस युद्ध में भाग नहीं लेगा। इसी कारण उनके बयान को लेकर फिर से विवाद पैदा हो गया है।