वॉशिंगटन डी. सी. : ईरान पर हमले के बाद ही अपने देश में विरोध का सामना करना पड़ा था अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को। उन्होंने तुरंत उस युद्ध को बंद करने की मांग की थी। इसको लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट के बीच बहस शुरू हो गई। बुधवार को ही अमेरिका की सीनेट ने उस युद्ध को जारी रखने के पक्ष में ‘फैसला’ दिया है। युद्धविरोधी जो प्रस्ताव दिया गया था वह भी अमेरिकी सीनेट में खारिज हो गया। सीनेट के अधिकांश सदस्यों ने अमेरिकी राष्ट्रपति का समर्थन किया। इसके परिणामस्वरूप युद्ध जारी रखने में अब ट्रंप के सामने कोई बाधा नहीं रही।
ईरान पर हमला जारी रहेगा यह ट्रंप ने बताया है। ईरान के खिलाफ अभियान अमेरिका और इजरायल जारी रखेंगे यह भी उन्होंने साफ कहा है।
ईरान में अमेरिका के अभियान को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट के बीच बहस चल रही है। रिपब्लिकनों का दावा है कि अभियान को लेकर निर्णय लेने की शक्ति राष्ट्रपति के पास है। उनका कहना है कि इस समय अभियान रोक देने से देश की राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावित होगी। हालांकि डेमोक्रेट का दावा है कि राष्ट्रपति के पास अकेले निर्णय लेने की कोई शक्ति नहीं थी। उन्होंने बिना योजना के युद्ध जारी रखने का फैसला लिया है, ऐसा भी उनका दावा है। साथ ही डेमोक्रेट का कहना है कि ट्रंप के इस फैसले से अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में पड़ रही है।
इसी कारण उन्होंने युद्धविरोधी प्रस्ताव पेश किया था।
हालांकि अमेरिकी सीनेट के अधिकांश सदस्यों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान अभियान के पक्ष में समर्थन दिया है। युद्ध बंद करने और ईरान के खिलाफ किसी भी सैन्य कदम के लिए कांग्रेस की अनुमति अनिवार्य करने की मांग वाले उस द्विदलीय प्रस्ताव को रोकने के पक्ष में उन्होंने वोट दिया।
इसके परिणामस्वरूप युद्ध बंद करने या ट्रंप की शक्तियों को कम करने का प्रस्ताव रद्द हो गया। साथ ही ईरान विरोधी किसी भी कार्रवाई को मानो विधायिका की स्वीकृति मिल गई है ऐसी मांग की गई है।
सीनेट सदस्यों में ट्रंप के पक्ष में 52 लोगों ने वोट दिया। विरोध में 48 लोगों ने।
यही बात ट्रुथ सोशल पर भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने कही है।
रॉयटर्स की जानकारी के अनुसार, इस निर्णय के कारण युद्ध को सीमित करने वाला यह ‘वार पावर्स रेजोल्यूशन’ या युद्ध शक्तियों से संबंधित प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पा रहा है। यदि यह प्रस्ताव पास हो जाता तो कांग्रेस की अनुमति के बिना ईरान में चल रहे युद्ध से अमेरिकी सेना को वापस लेना पड़ता। हालांकि इससे पहले भी इस तरह के कदम उठाए गए थे। तब भी वे विफल हुए थे।
दूसरी ओर बुधवार को ही व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने दावा किया कि ईरान में अमेरिका के अभियान के लिए ट्रंप के फैसले का समर्थन अमेरिका के निवासी करते हैं। उनका दावा है कि अमेरिका के इस कदम से देश के नागरिकों तथा विश्ववासियों की शांति सुनिश्चित हो रही है।