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एयरपोर्ट के पास नमाज़ की अनुमति नहीं, बाम्बे हाईकोर्ट ने कहा,-'किसी भी स्थान पर नमाज़ धार्मिक अधिकार नहीं'

हवाईअड्डे के आसपास सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दे होते हैं और ऐसे स्थानों पर किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लिया जा सकताःफैसला

By डॉ. अभिज्ञात

Mar 05, 2026 17:11 IST

मुंबईः बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए हवाईअड्डे जैसे संवेदनशील स्थानों के पास नमाज़ के लिए जगह देने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने याचिकाकर्ताओं से व्यापक जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखने की अपील भी की।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को कहा कि सुरक्षा किसी भी धार्मिक अधिकार से अधिक महत्वपूर्ण है। अदालत ने मुंबई हवाईअड्डे के पास टैक्सी और ऑटो-रिक्शा चालकों को रमज़ान के दौरान नमाज़ पढ़ने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

हवाईअड्डे के पास नमाज़ की अनुमति नहीं

न्यायमूर्ति बी. पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पूनीवाला के पीठ ने कहा कि रमज़ान इस्लाम का एक महत्वपूर्ण महीना है, लेकिन इसके आधार पर किसी भी स्थान को नमाज़ के लिए निर्धारित नहीं किया जा सकता। हवाईअड्डे के आसपास सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दे होते हैं और ऐसे स्थानों पर किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लिया जा सकता।

याचिका किसने दायर की

यह याचिका टैक्सी-रिक्शा ओला-उबर मेन्स यूनियन की ओर से दायर की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के पास एक अस्थायी शेड हुआ करता था, जहां वे नमाज़ अदा करते थे। पिछले वर्ष अधिकारियों ने उस शेड को हटा दिया। इसके बाद याचिका में मांग की गई कि उन्हें उसी स्थान पर या आसपास किसी अन्य जगह पर नमाज़ पढ़ने की अनुमति दी जाए।

अधिकारियों की रिपोर्ट

अदालत के निर्देश पर पुलिस और हवाईअड्डा प्राधिकरण ने आसपास सात अन्य स्थानों का सर्वेक्षण किया। रिपोर्ट में बताया गया कि भीड़-भाड़, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और हवाईअड्डे के विकास से जुड़ी योजनाओं के कारण कोई भी स्थान नमाज़ के लिए उपयुक्त नहीं पाया गया। अदालत ने रिपोर्ट देखने के बाद कहा कि हवाईअड्डे की सुरक्षा से जुड़े मामले में किसी प्रकार की राहत देना संभव नहीं है।

अदालत की सख्त टिप्पणी

अदालत ने कहा कि हवाईअड्डे के पास किसी भी प्रकार का धार्मिक ढांचा या प्रार्थना स्थल नहीं बनाया जा सकता। पीठ ने कहा कि सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जा सकता क्योंकि इस हवाईअड्डे से हर धर्म के लोग यात्रा करते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता यह तय नहीं कर सकते कि वे किस स्थान पर नमाज़ पढ़ेंगे। अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति किसी सार्वजनिक मैदान के बीच में खड़े होकर नमाज़ पढ़ने की मांग करे तो उसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

वैकल्पिक स्थान का सुझाव

अदालत ने यह भी बताया कि उस क्षेत्र से लगभग एक किलोमीटर दूरी पर एक मदरसा है, जहां नमाज़ अदा की जा सकती है। साथ ही अदालत ने सुझाव दिया कि भविष्य में जब हवाईअड्डे के टर्मिनल-एक का पुनर्विकास होगा, तब याचिकाकर्ता प्राधिकरण को आवेदन देकर नमाज़ के लिए स्थान उपलब्ध कराने का अनुरोध कर सकते हैं।

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