वॉशिंगटन : अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि दोनों देशों के बीच अभी तक किसी ठोस सहमति का रास्ता नहीं निकल पाया है। इस बीच ईरान ने अपने मसौदा शांति प्रस्ताव में संशोधन करने की इच्छा जताई है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि लंबे समय से जारी तनाव और संघर्ष को समाप्त करने की दिशा में नई पहल हो सकती है।
ईरान द्वारा भेजे गए पहले शांति प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी तरह अस्वीकार कर दिया था। उनका कहना था कि प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है। इसके बाद तेहरान ने संशोधित प्रस्ताव भेजा, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने उस पर भी संतोष व्यक्त नहीं किया। ट्रंप का आरोप था कि नए मसौदे में मूल बातें वही है केवल भाषा बदली गई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति की कड़ी प्रतिक्रिया के बाद ईरान एक बार फिर अपने प्रस्ताव में बदलाव करने पर सहमत हुआ है। ईरान सरकार के करीबी समाचार संस्थान तसनिम न्यूज एजेंसी ने रविवार को यह दावा किया। हालांकि एजेंसी ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक किसी अंतिम समझौते पर मुहर नहीं लगी है।
दोनों देशों के बीच युद्ध समाप्त करने और शांति समझौते को अंतिम रूप देने को लेकर लगातार बातचीत जारी है। लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। इसी सिलसिले में पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मौजूदगी में भी कई उच्चस्तरीय बैठकें आयोजित की गई हैं।
समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार संभावित शांति समझौते को तीन चरणों में लागू किया जा सकता है। पहले चरण में औपचारिक रूप से युद्ध समाप्ति की घोषणा की जाएगी। दूसरे चरण में हॉर्मुज संकट के समाधान पर काम होगा। तीसरे चरण में व्यापक समझौते के लिए 30 दिन की वार्ता प्रक्रिया शुरू की जाएगी, जिसे आवश्यकता पड़ने पर आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
हालांकि अमेरिका ने कुछ शर्तों को लेकर अपना रुख बेहद स्पष्ट रखा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार नहीं रख सकता। उनके अनुसार ईरान को यूरेनियम से संबंधित प्रतिबद्धताओं पर स्पष्ट कदम उठाने होंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का टोल नहीं लगाया जा सकता।
समाचार पोर्टल एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका अब भी समझौते की संभावना बनाए रखना चाहता है। इस विषय पर ट्रंप ने कहा कि अभी भी कई पक्ष समझौते में रुचि रखते है हालांकि कुछ ऐसे लोग भी हैं जो संघर्ष को आगे बढ़ते देखना चाहते हैं।
अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 24 मई को ईरान द्वारा भेजे गए मसौदा शांति समझौते के कई बिंदुओं पर ट्रंप ने आपत्ति जताई थी। विशेष रूप से ईरान की जब्त की गई संपत्तियों को मुक्त करने और परमाणु कार्यक्रम से संबंधित शर्तों को और अधिक कठोर बनाने की मांग की गई थी।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान ने इन सभी अमेरिकी मांगों को स्वीकार किया है या नहीं। लेकिन तसनिम न्यूज एजेंसी का कहना है कि मसौदा समझौते में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए जाने की तैयारी चल रही है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस पूरे मुद्दे पर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि यह मान लेना गलत होगा कि ईरान ने अमेरिका द्वारा सुझाए गए सभी संशोधनों को स्वीकार कर लिया है।
अराघची के अनुसार, “हम मसौदा समझौते में कुछ बदलाव करेंगे, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हमने अमेरिका की हर शर्त मान ली है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान केवल उन्हीं शर्तों पर किसी समझौते पर हस्ताक्षर करेगा जिन्हें वह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप मानता है।
इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा था कि समय तेजी से निकल रहा है और जल्द निर्णय लेना आवश्यक है। उन्होंने लिखा था कि यदि शीघ्र कदम नहीं उठाए गए तो नुकसान की भरपाई संभव नहीं होगी।
अपने संदेश में ट्रंप ने समय के महत्व पर विशेष जोर दिया था। उन्होंने बार-बार कहा कि परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं और निर्णय लेने के लिए उपलब्ध समय लगातार कम होता जा रहा है। ऐसे में दोनों देशों के बीच जारी बातचीत पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं और आने वाले दिनों में शांति समझौते को लेकर महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।