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क्या नाव किनारे पर पहुंचकर बार-बार डूब जाती है? घर में कालसर्प दोष तो नहीं है? कैसे पता चलेगा?

मानसिक तनाव, शारीरिक परेशानियां और पैसे की तंगी भी जिंदगी का हिस्सा बन जाती है। ज्योतिष के अनुसार, कालसर्प दोष एक नेगेटिव योग है जो जिंदगी के संघर्ष को लंबा खींचता है।

ज्योतिष में कालसर्प दोष को एक अशुभ योग माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दोष के साथ पैदा हुए व्यक्ति को अपने जीवन में कई तरह की मुश्किलों, संघर्षों और अस्थिरता का सामना करना पड़ता है। कई बार ऐसा देखा जाता है कि कोई काम सफल होते-होते रुक जाता है। मानसिक तनाव, शारीरिक परेशानियां और पैसे की तंगी भी जीवन का हिस्सा बन जाती है। ज्योतिष के अनुसार, कालसर्प दोष एक नेगेटिव योग है जो जीवन के संघर्ष को लंबा खींचता है।

कालसर्प दोष कब बनता है?

ज्योतिष के अनुसार, कालसर्प दोष तब बनता है जब किसी व्यक्ति की कुंडली में सभी ग्रह राहु और केतु के बीच में होते हैं। यह दोष कुल 12 तरह का होता है और हर एक का अलग-अलग असर हो सकता है।

कालसर्प दोष के 12 प्रकार

अनंत कालसर्प दोष - जब राहु लग्न (पहले घर) में हो और केतु सातवें घर में हो और बाकी सभी ग्रह उनके बीच में हों।

कुलिक कालसर्प दोष - जब राहु दूसरे घर में और केतु आठवें घर में हो, तो यह दोष बनता है।

वासुकी कालसर्प दोष - जब राहु तीसरे घर में और केतु नौवें घर में हो, तो इसे वासुकी कालसर्प दोष कहते हैं।

शंखपाल कालसर्प दोष - यह दोष तब बनता है जब राहु चौथे घर में और केतु दसवें घर में हो।

पद्म कालसर्प दोष - अगर राहु पांचवें घर में और केतु ग्यारहवें घर में हो, तो पद्म कालसर्प दोष बनता है।

महापद्म कालसर्प दोष - अगर राहु छठे घर में और केतु बारहवें घर में हो, तो इसे महापद्म कालसर्प दोष कहते हैं।

तक्षक कालसर्प दोष - अगर राहु सातवें घर में और केतु लग्न (पहले घर) में हो, तो यह दोष बनता है।

कर्कोटक कालसर्प दोष - अगर राहु आठवें घर में और केतु दूसरे घर में हो, तो इसे कर्कोटक कालसर्प दोष कहते हैं।

शंखचूड़ कालसर्प दोष - अगर राहु नौवें घर में और केतु तीसरे घर में हो, तो यह दोष बनता है।

घटक कालसर्प दोष - अगर राहु दसवें घर में और केतु चौथे घर में हो, तो इसे घटक कालसर्प दोष कहते हैं।

जहरीला कालसर्प दोष - अगर राहु ग्यारहवें घर में और केतु पाँचवें घर में हो, तो जहरीला कालसर्प दोष बनता है।

शेषनाग कालसर्प दोष - अगर राहु बारहवें घर में और केतु छठे घर में हो, तो इस दोष को शेषनाग कालसर्प दोष कहते हैं।


क्या आप समझते हैं कालसर्प दोष के लक्षण?


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कोष्टी में कालसर्प दोष होने पर कुछ लक्षण देखे जा सकते हैं-

-सपने में बार-बार मरे हुए लोगों को देखना।

-नींद के दौरान ऐसा महसूस होता है मानो कोई गला दबा रहा हो या दम घोंट रहा हो।

-जीवन के हर क्षेत्र में व्यक्ति को अतिरिक्त संघर्ष करना पड़ता है।

-अकेलापन और भावनात्मक खालीपन अक्सर महसूस होता है।

-व्यवसायों को बार-बार घाटा उठाना पड़ता है और आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

-नींद में ऐसा लगता है जैसे कोई सांप शरीर पर चल रहा हो या सांप काट रहा हो।

-दांपत्य जीवन में अशांति और जीवनसाथी से बार-बार विवाद होना।

-वह रात में बार-बार जाग जाता है।

-सपने में अक्सर लड़ाई-झगड़े या झगड़े देखने को मिलते हैं।

-सिरदर्द, त्वचा रोग समेत कई तरह की मानसिक और शारीरिक समस्याएं लंबे समय तक बनी रह सकती हैं।

कालसर्प दोष का निवारण कैसे करें?


ज्योतिष के अनुसार नियमों का पालन करने से इस दोष के प्रभाव को काफी कम किया जा सकता है।


-घर या मंदिर में प्रतिदिन शिवलिंग का अभिषेक करें।

-प्रदोष तिथि पर शिव मंदिर में किया गया रुद्राभिषेक।

-प्रतिदिन अपने मूल देवता की पूजा करें।

-प्रतिदिन 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

-प्रतिदिन 11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।

-घर में मोर पंख रखें।

कालसर्प दोष पूजा के लाभ

यद्यपि कालसर्प दोष को दूर करने के लिए कई उपाय हैं, लेकिन ऐसा माना जाता है कि उचित नियमों का पालन करके और किसी अनुभवी ज्योतिषी की सलाह के अनुसार पूजा करके नकारात्मक प्रभावों को काफी कम या समाप्त किया जा सकता है।

काल सर्प दोष खत्म होने पर क्या होता है?

-दांपत्य जीवन सुखी और शांतिपूर्ण बनता है।

-पति-पत्नी के बीच प्यार और समझ बढ़ती है।

-समाज में मान-सम्मान बढ़ता है।

-परिवार में शांति, सुख और समृद्धि आती है।

-कारोबार में रुकावटें और परेशानियां खत्म होने लगती हैं।

-कार्यस्थल पर पदोन्नति और सम्मान मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

-धीरे-धीरे आर्थिक संकट दूर हो जाता है और यथास्थिति आ जाती है।

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