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'हम दो हमारा एक' की सोच पर भड़के बालमुकुंद आचार्य, बोले- ऐसे ही रहा तो हम 'अल्पसंख्यक' और 'चच्चा' बहुसंख्यक हो जाएंगे

'चच्चा' शब्द का इस्तेमाल करते हुए जनसंख्या असंतुलन पर चेतावनी दी और बताया क्यों 'हम दो हमारा एक' की सोच घातक है।

By लखन भारती

Apr 10, 2026 12:33 IST

जयपुरः राजस्थान के अजमेर जिले में गुरुवार को दक्षिणमुखी बालाजी हनुमान धाम में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान जयपुर की हवामहल सीट से विधायक बालमुकुंद आचार्य ने जनसंख्या और परिवार व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने समाज को चेतावनी देते हुए कहा कि 'हम दो हमारा एक' की मानसिकता भविष्य में हमारी संस्कृति और सामाजिक संतुलन के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकती है।

'हम अल्पसंख्यक और चच्चा बहुसंख्यक हो जाएंगे'

बालमुकुंद आचार्य ने अपने संबोधन में जनसंख्या असंतुलन की ओर इशारा करते हुए कहा कि यदि हम 'हम दो हमारा एक' तक ही सीमित रहे, तो वह दिन दूर नहीं जब हम खुद अपने ही देश में अल्पसंख्यक हो जाएंगे और 'चच्चा' बहुसंख्यक हो जाएंगे। उन्होंने युवाओं और परिवारों से अपील करते हुए एक नया नारा दिया- 'हम दो हमारे दो-चार होने दो।'

चीन का उदाहरण और आत्मनिर्भरता का तर्क

जनसंख्या बढ़ने से बेरोजगारी और संसाधनों की कमी के तर्कों को नकारते हुए उन्होंने चीन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि चीन में जनसंख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद वहां व्यापार मजबूत है और देश आत्मनिर्भर है। आचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भर तो बन रहा है, लेकिन इसके लिए परिवारों का बड़ा होना जरूरी है।

'एक बच्चे की सोच से टूट रहे रिश्ते'

उन्होंने पुरानी परंपराओं को याद दिलाते हुए कहा कि पहले 10-12 बच्चों के बड़े परिवार होते थे, जिससे चाचा, ताऊ और भाई-बहन जैसे रिश्तों की मजबूती बनी रहती थी. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक ही बच्चा होगा और वह करियर के लिए बाहर चला गया, तो पीछे बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल कौन करेगा? उन्होंने आगे कहा, 'अगर परिवार में सदस्य अधिक होंगे, तभी कोई फौज में जाएगा, कोई पुलिस में भर्ती होगा, कोई व्यापार संभालेगा और कोई खेती-किसानी करेगा. कुछ बच्चे राष्ट्र और संस्कृति की सेवा के लिए भी आगे आएंगे.'

'सिर्फ सरकारी नौकरी के पीछे न भागें युवा'

कार्यक्रम के दौरान उन्होंने युवाओं को केवल सरकारी नौकरी की सोच तक सीमित न रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवाओं को खुद रोजगार देने वाला बनने की दिशा में काम करना चाहिए। कार्यक्रम के समापन पर महाआरती का आयोजन हुआ, जिसमें भारी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। बालमुकुंद आचार्य ने अंत में समाज को एकता, आत्मनिर्भरता और अपनी संस्कृति के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया।

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