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बेलडांगा में हिंसा की जांच NIA ही करेगी, सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नहीं किया हस्तक्षेप

बुधवार को कोलकाता हाईकोर्ट के निर्देश पर सुप्रीम कोर्ट ने नहीं किया हस्तक्षेप।

By अरिंदम बनर्जी, Posted by: लखन भारती

Feb 11, 2026 15:29 IST

मुर्शिदाबादःबेलडांगा में हुई गड़बड़ी, तोड़फोड़ और आगजनी की घटना की जांच का दायित्व NIA के ही हाथ में रहेगा। राज्य ने कोलकाता हाईकोर्ट के निर्देश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था लेकिन बुधवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने सुनवाई में कहा कि वे NIA की जांच में हस्तक्षेप नहीं करेंगे। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाईकोर्ट के निर्देश को बरकरार रखा। मामला पुनः हाईकोर्ट में भेजा गया।

इस दिन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जयमल्य बागची की डिवीजन बेंच में राज्य के वकील कल्याण बंद्योपाध्याय ने कहा, 'हाईकोर्ट के निर्देश के बाद ही NIA जांच शुरू हुई है।' केंद्र की तरफ के वकील ने कहा, NIA ने जांच शुरू कर दी है। FIR दर्ज कर दी गई है। वकील कल्याण बंद्योपाध्याय ने बताया, UAPA कानून लागू किया गया है।

कल्याण की टिप्पणी के बाद ही न्यायाधीश जयमाल्य बागची ने कहा, 'हाईकोर्ट ने कुछ टिप्पणियां जारी की हैं। उसके आधार पर उन्होंने स्वत: संज्ञान लेकर NIA जांच का आदेश दिया है। आप लोग हाईकोर्ट में वापस जाएं, आवेदन देकर बताएं कि वहां ब्लॉक किया गया था। सामान और लोगों की आवाजाही में बाधा थी। दो प्रवासी मजदूरों की मौत के कारण उत्पन्न जनता के गुस्से में विरोध प्रदर्शन हुए थे।'

प्रधान न्यायाधीश सूरज कांट और न्यायाधीश बागची ने कहा, 'इस मामले में UAPA लागू किया जा सकता है या नहीं, यह देखना होगा। हम NIA से कहेंगे कि रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में जमा करें। सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा, यह दोनों बातें कानून में कही गई हैं। यहाँ दोनों ही प्रभावित हुई हैं। आप हाईकोर्ट को कहें कि वहां किसी तरह का विस्फोटक इस्तेमाल नहीं किया गया है।'

केंद्र की ओर से वकील राजू ने कहा, 'गंभीर हथियारों का उपयोग किया गया है। यह क्षेत्र बांग्लादेश की सीमा के बहुत पास है। कई दुकानें पेट्रोल डालकर जलाई गई हैं। हम निष्पक्ष जांच कर रहे हैं। राज्य हमें सभी दस्तावेज नहीं दे रहा है। राज्य की FIR कह रही है कि घातक हथियार का उपयोग किया गया है।' न्यायाधीश सूरज कांट ने वकील राजू से कहा, 'यह आपके एजेंसी का जिम्मा है। वे सब कुछ अच्छी तरह देखेंगे।'

इस दिन न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची ने केंद्र के वकील से कहा, ‘हम आपकी जांच में प्रवेश नहीं कर रहे हैं। देखने वाली बात यह है कि क्या UAPA धारा लागू की जा सकती है या नहीं। हमने देखा, पिछले साल अप्रैल में इस क्षेत्र में इससे भी बड़े घटना घटी थी। उस समय NIA सो रही थी। अब तो ऐसी क्या स्थिति हुई कि रातोंरात सेक्शन 15 के तहत UAPA लागू कर दिया गया ? हर भावनात्मक फटकार को आतंकवाद के पैकेज में नहीं रखा जा सकता।’ वकील कल्याण ने बताया कि अब तक 33 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। राज्य पुलिस ने AIR दर्ज कर जांच शुरू की है। आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की नेतृत्व वाली बेंच के आदेशानुसार, NIA अपनी जांच से संबंधित स्थिति रिपोर्ट कोलकाता उच्च न्यायालय में प्रस्तुत करेगी। वहां NIA को बताना होगा कि क्या उन्होंने जांच में UAPA कानून लागू करने योग्य किसी आपातकालीन मुद्दे को देखा है या नहीं। फिर इस मामले की सुनवाई कोलकाता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की बेंच में होगी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वहां राज्य सरकार भी अपनी राय व्यक्त कर सकती है।

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