मतदाता सूची का मसौदा (Draft) जारी होने के बाद से ही 1.36 करोड़ मतदाताओं के नामों को लेकर विवाद चल रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने 31 दिसंबर को दिल्ली में मुख्य चुनाव आयोग में बैठक के दौरान 1.36 करोड़ 'संदिग्ध' मतदाताओं की सूची जारी करने की मांग की है।
वहीं राज्य CEO के ऑफिस के सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मसौदा सूची जारी होने के बाद इन 1.36 करोड़ मतदाताओं की स्क्रूटनी शुरू हुई। दावा किया जा रहा है कि अब यह संख्या घटकर 94.49 लाख हो गयी है।
बताया जाता है कि स्क्रूटनी शुरू होने के बाद 'संदिग्ध' मतदाताओं की संख्या में बहुत कमी आई है। इन 94.49 लाख मतदाताओं में से 54 लाख लोगों के नाम सूची में नहीं मिले। 4 लाख 74 हजार ऐसे लोग हैं जिनका अपने माता-पिता की उम्र में 15 साल से कम का अंतर पाया गया है। 8 लाख 41 हजार लोगों का माता-पिता की उम्र में 50 साल से ज्यादा का अंतर पाया गया है। वहीं लगभग 3 लाख ऐसे लोग हैं जिनका दादा-दादी की उम्र से 40 साल से कम का अंतर है।
इसके अलावा करीब 24 लाख मतदाताओं ने 6 से ज्यादा लोगों की प्रोजेनी मैपिंग करवाई है। यानी ऐसे 6 मतदाताओं ने एन्यूमरेशन फॉर्म में एक ही व्यक्ति को 'पिता' बताया है। कमीशन ने इन 'संदिग्ध' मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाने की तैयारी शुरू कर दी है। बताया जाता है कि नोटिस तैयार करने का काम शुरू हो गया है।
वहीं दूसरी तरफ कई जिलों से शिकायतें सामने आ रही हैं कि मतदाताओं के जिंदा होने के बावजूद उन्हें 'मृत' दिखाया जा रहा है। शुक्रवार को दक्षिण 24 परगना में तृणमूल कांग्रेस ने एक राजनैतिक सभा के दौरान ऐसे तीन मतदाताओं को भी पेश किया। मिली जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग ने इस मामले में जिले के DEO को तुरंत नोटिस भेजा है।