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चिल्ड्रेनस मेंटल हेल्थ वीक पर ‘प्ले, अटैचमेंट एंड इमोशनल ग्रोथ’ विषयक जागरूकता सत्र आयोजित

खेल और भावनात्मक विकास से सशक्त होगी नई पीढ़ी, विद्यालय और परिवार के समन्वय से मजबूत बनेगा बाल मन

By रजनीश प्रसाद

Feb 11, 2026 20:17 IST

कोलकाता : चिल्ड्रेनस मेंटल हेल्थ वीक के अवसर पर एसपीके जैन फ्यूचरिस्टिक अकादमी ने अर्ली चाइल्डहुड एसोसिएशन (ईसीए) के सहयोग से “प्ले, अटैचमेंट एंड इमोशनल ग्रोथ” विषय पर एक विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालयी परिप्रेक्ष्य में बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के महत्व को रेखांकित करना और भावनात्मक रूप से सुरक्षित शिक्षण वातावरण के निर्माण पर बल देना था।

सत्र में विस्तार से बताया गया कि खेल आधारित शिक्षा, सुरक्षित लगाव (सिक्योर अटैचमेंट) और भावनात्मक विकास बच्चों के समग्र विकास तथा सीखने के परिणामों को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को केवल समय-समय पर किए जाने वाले हस्तक्षेपों तक सीमित नहीं रखना चाहिए बल्कि इसे विद्यालय की दैनिक गतिविधियों, कक्षा संवाद और पारिवारिक वातावरण का अभिन्न हिस्सा बनाना आवश्यक है।

कार्यक्रम में शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी रही। वक्ताओं ने भावनात्मक रूप से सहयोगी और संवेदनशील शिक्षण वातावरण तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया। यह भी रेखांकित किया गया कि बच्चों की भावनात्मक आवश्यकताओं को समझने और पूरा करने में विद्यालय और परिवार के बीच समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिससे संतुलित और सशक्त वातावरण का निर्माण संभव हो सके।

सत्र का संचालन मनोवैज्ञानिक एवं अन्नन्ता की संस्थापक माधुरी सरदा तथा मनोचिकित्सक एवं सह-संस्थापक विधि बंसल ने किया। उन्होंने अपने व्यावसायिक अनुभवों के आधार पर शिक्षकों और अभिभावकों को व्यावहारिक सुझाव दिए। उनके अनुसार, शिक्षकों को बच्चों के भावनात्मक संकेतों की पहचान, विश्वास पर आधारित संबंधों के निर्माण और अभिभावकों के साथ सतत संवाद पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

कार्यक्रम में डॉ. सुमन सूद, डायरेक्टर एवं प्रिंसिपल, बी.डी. मेमोरियल जूनियर तथा ईसीए की नेशनल कोर कमिटी सदस्य की गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की महत्ता को और बढ़ाया।

एसपीके जैन फ्यूचरिस्टिक अकादमी की प्रिंसिपल डॉ. जयिता गांगुली ने कहा कि भावनात्मक कल्याण बच्चों की शिक्षण यात्रा का अभिन्न अंग है। इस पहल के माध्यम से विद्यालय और ईसीए ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने हेतु संवेदनशील और समावेशी शैक्षणिक पद्धतियों को प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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