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CAA आंदोलन के दौरान रेल संपत्ति में आगजनी की फिर होगी जांच, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दिए निर्देश

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ बैठक के बाद लिया गया फैसला।

कोलकाता : संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध में हुए आंदोलन की गूंज देश के अन्य हिस्सों की तरह पश्चिम बंगाल में भी सुनाई दी थी। उस समय राज्य के कई इलाकों में सड़क जाम और विरोध प्रदर्शन आम बात बन गए थे। हालांकि मुर्शिदाबाद के कुछ क्षेत्रों में आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया था। वहां रेलवे संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने, ट्रेनों में आग लगाने और रेलवे स्टेशनों में व्यापक तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई थीं। इन घटनाओं के कारण लंबे समय तक रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई थीं।

अब उन घटनाओं को लेकर एक बार फिर जांच शुरू करने की तैयारी की जा रही है। जिन लोगों पर रेलवे की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे थे, उनकी पहचान कर पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोलने का निर्देश मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने दिया है। उन्होंने पुलिस को एक विशेष प्रकोष्ठ (स्पेशल सेल) बनाकर मामले की जांच करने के निर्देश भी दिए हैं।

शनिवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं को लेकर नवान्न में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ बैठक की। इसी दिन राज्य सरकार की ओर से यह नया निर्देश भी सामने आया। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री से संबंधित मामलों की फाइलें फिर से खोलने का अनुरोध किया था, जिसके बाद यह प्रक्रिया शुरू करने का निर्णय लिया गया।

मुर्शिदाबाद में क्या हुआ था?

यह पूरा घटनाक्रम वर्ष 2019 का है। उस समय संसद में नागरिकता संशोधन कानून पारित हुआ था। तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस कानून के विरोध में सड़कों पर उतरकर आंदोलन किया था। उसी दौरान मुर्शिदाबाद में विरोध प्रदर्शन बेहद उग्र हो गया था।

आरोप था कि रेलवे स्टेशन पर खड़ी खाली ट्रेनों में तोड़फोड़ की गई और उनमें आग लगा दी गई। कई डिब्बे आग की लपटों में घिर गए थे। स्टेशन मास्टर के कार्यालय, टिकट काउंटर और कंट्रोल रूम सहित रेलवे के विभिन्न हिस्सों में व्यापक तोड़फोड़ की घटनाएं हुई थीं।

इन घटनाओं के कारण उस समय कई लंबी दूरी की ट्रेनों को रद्द करना पड़ा था, जबकि अनेक ट्रेनों का मार्ग बदलकर उन्हें दूसरे रास्तों से चलाया गया था।

सूत्रों के मुताबिक, नवान्न में आयोजित बैठक के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से भवानीपुर में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) का एक कार्यालय स्थापित करने का अनुरोध किया। बताया जा रहा है कि इसी कार्यालय से रेलवे पुलिस के अधिकारी कंप्यूटर के माध्यम से इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच करेंगे। वहीं से पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खोली जाएंगी और आरोपित व्यक्तियों की पहचान की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने राज्य के गृह सचिव और राज्य पुलिस महानिदेशक को भी निर्देश दिया है कि वे रेलवे सुरक्षा बल को हरसंभव सहयोग प्रदान करें। रेल मंत्री ने भी इस संबंध में राज्य सरकार को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।

रेलवे कानून के अनुसार रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, तोड़फोड़ करना या किसी प्रकार की अवैध गतिविधि में शामिल होना दंडनीय अपराध है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने पर जेल और जुर्माने दोनों का प्रावधान है।

सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री ने रेल मंत्री से यह भी अनुरोध किया है कि पुराने मामलों की जांच के दौरान आरोपियों की पहचान के लिए उपलब्ध सभी आधुनिक और उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जाए।

इस मामले की जांच से जुड़े कुछ लोगों का पहले से यह मानना रहा है कि इन घटनाओं के पीछे विदेशी आतंकवादी संगठनों या प्रतिबंधित संगठनों की भूमिका हो सकती है। हालांकि इस संबंध में जांच के निष्कर्षों का इंतजार किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद जिन व्यक्तियों के खिलाफ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या आगजनी में शामिल होने के आरोप प्रमाणित होंगे, उनसे कानूनी प्रक्रिया के तहत रेलवे और सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की पूरी आर्थिक भरपाई वसूल की जाएगी।

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