कोलकाता : कोलकाता के बड़ा बाजार स्थित पूर्वी भारत के एकमात्र पारसी उपासना स्थल और ए-वन हेरिटेज दर्जा प्राप्त फायर टेम्पल के संरक्षण और पुनर्निर्माण को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। न्यायालय ने मंदिर परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है, ताकि आग से क्षतिग्रस्त इस ऐतिहासिक धरोहर के मरम्मत एवं पुनरुद्धार कार्य को आगे बढ़ाया जा सके।
उच्च न्यायालय ने कोलकाता नगर निगम, कोलकाता पुलिस और हेरिटेज कमेटी को निर्देश दिया है कि वे सभी आवश्यक पहलुओं की जांच कर एक महीने के भीतर बड़ा बाजार स्थित इस मंदिर परिसर और उसके आसपास के क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त करें। यह मंदिर पिछले वर्ष लगी आग में क्षतिग्रस्त हो गया था।
न्यायमूर्ति अरिंदम मुखोपाध्याय ने आदेश देते हुए कहा कि संबंधित सभी प्राधिकरणों को मंदिर की वास्तविक सीमा निर्धारित करनी होगी और 26 एजरा स्ट्रीट के बाहरी हिस्से में मौजूद सभी प्रकार के अतिक्रमण हटाने होंगे। न्यायालय ने केवल मंदिर परिसर ही नहीं, बल्कि उसके आसपास की सड़क और फुटपाथों से भी अवैध कब्जे हटाने का निर्देश दिया है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि अतिक्रमण हटाने के बाद भविष्य में दोबारा उस क्षेत्र पर कब्जा न हो सके।
पिछले वर्ष के अंत में एजरा स्ट्रीट स्थित इस पारसी फायर टेम्पल में आग लगने से भवन को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद मंदिर के मरम्मत और पुनर्निर्माण की तैयारियां शुरू की गईं। हालांकि मंदिर के चारों ओर बड़ी संख्या में दुकानें और अन्य अस्थायी संरचनाएं मौजूद होने के कारण कार्य शुरू नहीं हो सका।
मंदिर ट्रस्ट ने इसी समस्या को लेकर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। ट्रस्ट का कहना था कि आसपास के अतिक्रमण के कारण मंदिर के संरक्षण और मरम्मत का काम बाधित हो रहा है।
मामले में पक्षकार बने कुछ स्थानीय दुकानदारों ने अदालत में दावा किया कि वे लंबे समय से वहां व्यवसाय कर रहे हैं और उनका कब्जा वैध है। इसके बाद न्यायालय ने पुलिस, नगर निगम और अन्य संबंधित एजेंसियों को मौके का निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद न्यायालय ने पाया कि 26 एजरा स्ट्रीट क्षेत्र में मौजूद व्यक्तियों में से कोई भी अपने कब्जे को वैध साबित करने के लिए किरायेदारी या लाइसेंस से संबंधित कोई कानूनी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका।
हालांकि दुकानदारों की ओर से इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताई गई। उनका दावा था कि उनके पास कब्जे को वैध साबित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं। इसके बावजूद अदालत ने उपलब्ध रिपोर्ट और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई के निर्देश जारी किए।
न्यायमूर्ति अरिंदम मुखोपाध्याय ने अपने आदेश में कहा कि यह विवाद कई बार अदालत के समक्ष आ चुका है और विभिन्न चरणों में निर्देश भी दिए गए हैं। इसके बावजूद आग से क्षतिग्रस्त फायर टेम्पल का मरम्मत और संरक्षण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
अदालत ने कहा कि मंदिर के पुनर्निर्माण और संरक्षण के लिए पूरे परिसर तथा उसके आसपास के क्षेत्र को पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त करना आवश्यक है। ऐसा होने पर ही श्रमिकों का आवागमन सुगम होगा, निर्माण सामग्री आसानी से भीतर पहुंच सकेगी और मरम्मत कार्य सुरक्षित ढंग से संचालित किया जा सकेगा।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सबसे पहले आसपास मौजूद सभी प्रकार के कब्जों और अतिक्रमणों को हटाना जरूरी है। इसके लिए सभी संबंधित पक्षों को मिलकर विस्तृत सर्वेक्षण करना होगा और उसकी रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
इस आदेश से मंदिर के पुनर्निर्माण और संरक्षण कार्य को गति मिलने की संभावना है, वहीं प्रशासन पर भी तय समयसीमा के भीतर कार्रवाई पूरी करने का दबाव बढ़ गया है।