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रक्षा से लेकर डिजिटल अर्थव्यवस्था तक: 2026 का केंद्रीय बजट कैसे करेगा भारत को आत्मनिर्भर?

राजनाथ सिंह और अश्विनी वैष्णव ने केंद्रीय बजट को ऐतिहासिक बताया। रक्षा क्षेत्र के लिए 7.85 लाख करोड़ रुपये का ऐलान। विनिर्माण और डिजिटल सेवाओं को मिलेगा बढ़ावा।

By श्वेता सिंह

Feb 01, 2026 17:46 IST

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए 2026 के बजट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "विकसित भारत" और "आत्मनिर्भर भारत" के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बजट में रक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता के विभिन्न पहलुओं पर जोर दिया गया, जो आगामी वर्षों में भारत की सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देगा।

सुरक्षा क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक प्रावधान

इस बजट की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि इसमें रक्षा क्षेत्र के लिए रिकॉर्ड 7.85 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि इस बजट से देश की सुरक्षा प्रणाली को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "आत्मनिर्भर भारत" के विजन के अनुरूप है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करेगा। खासतौर पर, इस बजट में तीनों सेनाओं के आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया है और इसके लिए 1.85 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

राजनाथ सिंह ने कहा, "यह बजट सुरक्षा, विकास और आत्मनिर्भरता का संतुलन बनाता है और हमारी सेनाओं को सक्षम बनाने के लिए विभिन्न सुधारों का प्रस्ताव करता है।" उनका यह बयान सुरक्षा के क्षेत्र में बजट के फोकस को साफ करता है, जो न केवल भारत की रक्षा क्षमता को और मजबूत करेगा बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में भी अहम कदम है।

विनिर्माण और डिजिटल क्षेत्र में नवाचार का समर्थन

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस बजट को समग्र विकास के लिए एक मजबूत नींव बताया और कहा कि विनिर्माण, आईटी सेवाओं और डिजिटल क्षेत्र को मजबूत करने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। विशेष रूप से डेटा केंद्रों के लिए टैक्स होलिडे का ऐलान किया गया है। आने वाले समय में भारत को डेटा-आधारित सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर सकता है।

उन्होंने कहा, "इस बजट में इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। यह सिर्फ भारत के लिए नए रोजगार और उद्यमिता के अवसर पैदा करेगा, बल्कि वैश्विक सेवाओं के लिए भी नए रास्ते खोलेगा।"

नई रेल परियोजनाओं की शुरुआत

इस बजट में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा भी की गई, जिसमें वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड ट्रेन कॉरिडोर को विशेष महत्व दिया गया। यह कदम देश के प्रमुख व्यापारिक और पर्यटन केंद्रों को एक दूसरे से जोड़ने के उद्देश्य से उठाया गया है। वैष्णव ने कहा, "हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से न केवल यात्रा में आसानी होगी, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में विकास की रफ्तार भी बढ़ेगी।"

बजट का समग्र दृष्टिकोण: विकास के हर पहलू पर ध्यान

केंद्रीय बजट में सुरक्षा और विकास को समान महत्व दिया गया है, जो भारत की समग्र आर्थिक वृद्धि को गति देगा। इसमें नवाचार, इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल विकास के लिए प्रोत्साहन दिया गया है, जबकि रक्षा क्षेत्र में मजबूत प्रावधान किए गए हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, इस बजट में कुल खर्च का अनुमान 53.5 लाख करोड़ रुपये रखा गया है, जिसमें से 11 लाख करोड़ रुपये की राशि पूंजीगत खर्च के लिए आवंटित की गई है। साथ ही, वित्तीय घाटा 4.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो इस बजट को आर्थिक दृष्टि से स्थिर और काबिल-ए-गौर बनाता है।

बजट का रुख विकास और आत्मनिर्भरता की ओर

कुल मिलाकर, इस बजट को एक दूरदर्शी दस्तावेज के रूप में देखा जा रहा है, जो न केवल भारत की सुरक्षा, बल्कि इसके आर्थिक विकास को भी नई दिशा देने का कार्य करेगा। इसमें किए गए प्रावधानों से स्पष्ट है कि सरकार ने "विकसित भारत" के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सभी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया है। चाहे वह रक्षा हो, डिजिटल सेवाएं हों या उच्च-गति वाले रेल नेटवर्क, इस बजट में भारत को एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं।

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