नयी दिल्लीः भारत में विमान रखरखाव को मजबूत करने की बात नरेंद्र मोदी सरकार पहले ही कह चुकी थी। इसी कारण देश के विभिन्न हिस्सों में एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉलिंग) यूनिट स्थापित करने की पहल की गई है। रविवार को पेश किए गए केंद्रीय बजट में भी इसका प्रतिबिंब दिखा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घोषणा की कि सामान्य और सैन्य विमानों के एमआरओ के लिए आवश्यक पुर्ज़ों के आयात पर अब कोई शुल्क नहीं लगेगा।
समुद्र-तटीय क्षेत्रों में पर्यटन को और लोकप्रिय बनाने के लिए मोदी सरकार सी-प्लेन शुरू करना चाहती है। छोटे विमान, जो पानी और ज़मीन दोनों पर उतर-उड़ान भर सकते हैं या तटीय एक शहर से दूसरे शहर के बीच केवल पानी पर ही टेक-ऑफ और लैंडिंग करने में सक्षम हों-ऐसे विमानों के लिए भी बजट में विशेष रियायतों की घोषणा की गई है। कहा गया है कि सी-प्लेन संचालन पर सब्सिडी दी जाएगी और जो कंपनियां भारत में सी-प्लेन बनाएंगी, उन्हें विशेष प्रोत्साहन (इंसेंटिव) मिलेगा।
अर्थशास्त्रियों के अनुसार भारत में विमान यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। परिणामस्वरूप उड़ानों की मांग भी बढ़ रही है। इसके साथ ही हवाई अड्डों की संख्या में इज़ाफ़ा हो रहा है। देश के दूरदराज़ इलाकों में छोटे-छोटे एयरस्ट्रिप्स के आसपास भी हवाई अड्डे विकसित किए जा रहे हैं। पिछले गुरुवार संसद में पेश की गई वित्तीय वर्ष 2026 की आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार 2024-25 में देश के हवाई अड्डों से कुल 41 करोड़ 20 लाख यात्रियों ने यात्रा की थी; वहीं 2030-31 तक यह संख्या बढ़कर 66 करोड़ 50 लाख तक पहुँच सकती है।