नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भारतीय संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने जा रही हैं। 1 फरवरी को वह लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश करेंगी और इसके साथ ही वह देश की सबसे लंबे समय तक लगातार पद पर रहने वाली वित्त मंत्री बन जाएंगी। उन्होंने 31 मई 2019 को वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाला था और 31 जनवरी 2026 को वह अपने कार्यकाल के छह वर्ष आठ महीने पूरे कर लेंगी।
अपने कार्यकाल के दौरान सीतारमण ने भारतीय अर्थव्यवस्था को कोविड-19 महामारी, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसे बड़े संकटों से निकालने में अहम भूमिका निभाई। इन्हीं वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ, जिससे उनके कार्यकाल को नीति-स्थिरता और संकट प्रबंधन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बजट सत्र से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस उपलब्धि को रेखांकित करते हुए कहा था कि लगातार नौवीं बार केंद्रीय बजट पेश करना भारत के संसदीय इतिहास के लिए गर्व का विषय होगा।
ऐतिहासिक तुलना करें तो पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने कुल 10 बार केंद्रीय बजट पेश किया था, जबकि पी. चिदंबरम ने नौ बार बजट प्रस्तुत किया, लेकिन ये कार्यकाल लगातार नहीं थे। लगातार लंबे समय तक वित्त मंत्री रहने का इससे पहले का रिकॉर्ड सी. डी. देशमुख के नाम था, जिन्होंने जून 1950 से लगभग छह वर्ष दो महीने तक यह पद संभाला।
आर्थिक सुधारों के लिए पहचाने जाने वाले मनमोहन सिंह जून 1990 से जून 1996 तक लगभग पांच वर्षों तक वित्त मंत्री रहे। बाद में प्रधानमंत्री रहते हुए उन्होंने 2008 और 2012 में कुछ समय के लिए वित्त मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। पी. चिदंबरम लगभग आठ वर्षों तक चार अलग-अलग कार्यकालों में वित्त मंत्री रहे।
लंबे समय तक लेकिन गैर-लगातार कार्यकाल वाले अन्य वित्त मंत्रियों में मोरारजी देसाई, प्रणब मुखर्जी, अरुण जेटली, वाई. बी. चव्हाण और यशवंत सिन्हा शामिल हैं। स्वतंत्र भारत के पहले वित्त मंत्री आर. के. शनमुखम चेट्टी थे।
इस पृष्ठभूमि में देखा जाए तो निर्मला सीतारमण का लगातार नौ बजट पेश करना केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत की आर्थिक नीति में निरंतरता और स्थायित्व का भी संकेत माना जा रहा है।