कोलकाताः पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार के बजट को 'पूर्णतः दिशाहीन बजट' कहा है। उनका दावा है कि 'बंगाल को कुछ भी नहीं मिला'। रविवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली के लिए उड़ान भरने से पहले हवाई अड्डे पर पत्रकारों से कहा कि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की बजट 'सिर्फ झूठे वादों का फुहार है, यानी यह हम्प्टी डम्प्टी बजट है।' यह बता दें कि 'हम्प्टी-डम्प्टी' अंग्रेजी बाल साहित्य और नर्सरी कविताओं का एक बेहद लोकप्रिय और ऐतिहासिक पात्र है, जो आमतौर पर हाथ,पैर और चेहरे एक बड़े अंडे के रूप में चित्रित है।
ममता बनर्जी ने कहा, ‘यह कृषि, महिलाओं, गरीबों, युवाओं और आदिवासियों के खिलाफ बजट है। शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा में निवेश कम किया गया है, कृषि क्षेत्र में खाद पर सब्सिडी घटाई गई है। यह सब झूठ का जाल है। अर्थव्यवस्था की स्थिति बिगड़ी है।’ इसके बाद बंगाल की उपलब्धियों की बात उठी। विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार से बंगाल को क्या मिला ? ममता ने कहा, ‘बंगाल के लिए उन्होंने कुछ भी नहीं दिया। सिर्फ बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं।… बंगाल के वोट के लिए उन्होंने कुछ भी नहीं दिया।’
उल्लेखनीय है, केंद्रीय बजट में बंगाल के लिए एक हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर और एक नया समर्पित फ्रेट कॉरिडोर बनाने की घोषणा की गई है। सूरत से हुगली जिले के डानकुनी तक एक नया समर्पित फ्रेट कॉरिडोर होगा। इसके अलावा बनारस से सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का भी जिक्र किया गया। ममता ने कहा, 'जब मैं रेल मंत्री थी, तब जो बजट पेश किया था, उसमें डानकुनी से अमृतसर तक फ्रेट कॉरिडोर की बात की गई थी। इस काम को 15 साल तक किसी ने पूरा नहीं किया। इसके विपरीत हम राज्य में छह नए आर्थिक कॉरिडोर बना रहे हैं। जिसमें डानकुनी से बर्दवान, बांका, दुर्गापुर, पुरुलिया शामिल हैं। एक और कल्याणी से बर्दवान, बीरभूम, मालदा, सिलीगुड़ी, कूचविहार जुड़ रहा है।'
बजट को लेकर अंतिम आलोचना तृणमूल सांसद अभिषेक बनर्जी ने भी की। अभिषेक ने कहा, 'बंगाल में वे हार रहे हैं, इसलिए भाजपा अपनी मातृविहीन मानसिकता के साथ बंगाल के लोगों को सजा देने की कोशिश कर रही है लेकिन लोकतंत्र में यह उल्टा असर करता है। आने वाले चुनाव में, जनता भाजपा को उपयुक्त जवाब देगी।' बेंगलुरु की तरह दो और NIMHANS संस्थान बनाने की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला ने की। अभिषेक ने कहा, 'इनमें से एक झारखंड और दूसरा असम में होगा। बंगाल के पूर्व में असम, पश्चिम में झारखंड। इसका मतलब यह है कि बंगाल के लोगों की समस्या होने पर वे असम या झारखंड जाएंगे, बंगाल नहीं। बंगाल के लोगों को अत्याचार में रखना। यही उनकी पहचान है।' रेलवे कॉरिडोर की घोषणा पर भी अभिषेक ने तंज कसते हुए कहा, 'यह पुरानी बोतल में नई शराब है।'