कोलकाताः केंद्रीय बजट 2026 को लेकर देशभर में चर्चा तेज है। इस बार बजट से पहले तीन प्रतिष्ठित चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने अपनी राय और सुझाव साझा किए हैं। उन्होंने इनकम टैक्स, अर्थव्यवस्था, एजुकेशन, टेक्नोलॉजी और सामाजिक सेक्टरों में सुधार के लिए अपनी उम्मीदें जाहिर की हैं।
दीपांकर चटर्जी: इनकम टैक्स और आर्थिक स्टिमुलस पर ध्यान
चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपांकर चटर्जी ने बताया कि बजट से पहले सबसे बड़ा बदलाव GST में हुआ है। उनका कहना है कि GST की दरें कम होने से बाजार में मांग को बढ़ावा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बदलाव अब धीरे-धीरे मांग को गति दे रहा है।
दीपांकर ने इनकम टैक्स को लेकर कहा कि हाल ही में नया कानून लागू किया गया है, जिसमें कुछ मार्जिनल छूटें दी जा सकती हैं। हालांकि, उनका मानना है कि इस बजट में कोई बड़ा टैक्स रिफॉर्म आने की संभावना कम है।
वह भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति पर भी रोशनी डालते हैं। उनके अनुसार, देश में तीन प्रमुख चुनौतियां हैं। पहली, प्राइवेट सेक्टर में निवेश की कमी। दूसरी, ब्याज दरें लगातार गिर रही हैं, जिससे बैंकिंग डिपॉजिट्स और सेविंग्स पर असर पड़ा है। तीसरी, मांग बढ़ी है लेकिन उत्पादन उतना नहीं बढ़ा है। दीपांकर का कहना है कि सरकार इन समस्याओं को हल करने के लिए स्टिमुलस पैकेज पेश कर सकती है। खासकर अमेरिका के टैरिफ के बाद एक्सपोर्ट की हालत चुनौतीपूर्ण है, इसलिए बजट में ऐसे उपाय जरूरी हैं जो अर्थव्यवस्था को एक “विटामिन डोज” दे सकें।
अरूप दासगुप्ता: AI, ई-कॉमर्स और हेल्थ सेक्टर में निवेश जरूरी
चार्टर्ड अकाउंटेंट अरूप दासगुप्ता का मानना है कि बजट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर काम कर रहे प्रोजेक्ट्स को समर्थन देना चाहिए। उनका सुझाव है कि डायग्नोस्टिक सेंटर PPP मॉडल के तहत आएं, जिससे बुजुर्ग नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
अरूप ने ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए भी बजट में विशेष इंसेंटिव देने की सिफारिश की। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने 2017-18 के लिए अपील फाइल नहीं की थी, उन्हें एक और मौका दिया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे करदाता विश्वास बढ़ेगा और कानून के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
रंजीत कुमार अग्रवाल: एजुकेशन और युवा शक्ति पर जोर
चार्टर्ड अकाउंटेंट रंजीत कुमार अग्रवाल का कहना है कि देश में बेरोजगारी की समस्या को हल करने के लिए एजुकेशन सेक्टर में निवेश बढ़ाना बेहद जरूरी है। उनका सुझाव है कि बजट में जीडीपी का कम से कम 5 प्रतिशत एजुकेशन और रिसर्च-इननोवेशन सेक्टर को आवंटित किया जाए।
रंजीत का मानना है कि दुनिया के बड़े देश रिसर्च और इनोवेशन के लिए भारी रकम आवंटित करते हैं, जिससे उनकी युवा पीढ़ी तकनीकी और व्यावसायिक रूप से सक्षम होती है। भारत को भी इस दिशा में कदम बढ़ाने की जरूरत है ताकि देश की युवा शक्ति का अधिकतम लाभ उठाया जा सके।
विशेषज्ञों की साझा राय
तीनों चार्टर्ड अकाउंटेंट्स का मानना है कि इस बजट का मुख्य फोकस अर्थव्यवस्था की वृद्धि, रोजगार सृजन, टेक्नोलॉजी और युवा-उन्मुख सेक्टरों पर होना चाहिए। उनका सुझाव है कि सरकार केवल कर सुधार और स्टिमुलस पैकेज पर ध्यान न दे, बल्कि एजुकेशन, रिसर्च, इनोवेशन, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्वास्थ्य सेक्टर में पर्याप्त निवेश सुनिश्चित करे।
तीनों विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि बजट को दीर्घकालिक दृष्टि से तैयार किया जाना चाहिए ताकि अर्थव्यवस्था के पहिए सुचारु रूप से चलें और युवा पीढ़ी, प्राइवेट सेक्टर और सरकारी संस्थान सभी इसका लाभ उठा सकें।
इस बजट से न केवल कर सुधार और आर्थिक स्थिरता की उम्मीद है, बल्कि तकनीकी नवाचार, युवा सशक्तिकरण और शिक्षा क्षेत्र में बड़े निवेश की भी अपेक्षा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन क्षेत्रों में बजट आवंटन बढ़ाया जाता है तो देश की अर्थव्यवस्था में वृद्धि, रोजगार सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा दोनों में मदद मिलेगी।